भिवानी। सभी स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकें बच्चों को पढ़ाने के निर्देश हैं। इसके बावजूद बच्चों की पीठ पर लदे बस्ते का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि बच्चे की पीठ पर लदे बस्ते में निजी प्रकाशकों की भारी भरकम पुस्तकें और वर्कबुक डली हैं।
निजी स्कूल अपने फायदे के लिए निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगा रहे हैं, जिससे मासूम बच्चों की पीठ पर भी उनके वजन से ज्यादा बस्ते का बोझ हो रहा है। इससे बच्चे न केवल मानसिक दबाव झेल रहे हैं, बल्कि अभिभावकों की जेब पर भी पांच से सात हजार का आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
हरियाणा स्कूली शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकें लगाने के साथ-साथ कक्षावार बस्ते का वजन भी निर्धारित किया हुआ है। अगर इससे अधिक बस्ते का वजन मिलता है तो इस पर निजी स्कूलों के खिलाफ नियमावली में कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। इसके बावजूद निजी स्कूलों को न नियमों की परवाह है न शिक्षा अधिकारियों की कार्रवाई का कोई डर। इन दिनों सरकारी स्कूलों में दाखिलों का दौर चल रहा है, लेकिन निजी स्कूल तो एक माह पहले ही बच्चों के दाखिले कर चुके हैं। उन्हें इसकी जल्दी इसलिए भी थी कि बच्चों के अभिभावकों से वार्षिक शुल्क वसूलने के साथ-साथ उनसे पाठ्यक्रम की पुस्तकों के नाम पर भी मोटा बजट खर्च कराना है, क्योंकि निजी प्रकाशक भी निजी स्कूलों को उनकी पुस्तकें लगाने के नाम पर मोटा कमीशन का लालच दे रहे हैं। इससे निजी स्कूलों को भी आम के आम गुठलियों के दाम जैसा फायदा नजर आ रहा है। (संवाद)
32 निजी स्कूलों में बच्चों की पीठ पर मिल चुका है निर्धारित से ज्यादा बस्ते का वजन
शिक्षा विभाग की हिदायतों के बाद उप जिला शिक्षा अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट में भिवानी के 32 निजी स्कूलों में बच्चों की पीठ पर लदे बस्ते का निर्धारित से करीब डेढ़ गुना वजन मिल चुका है। इसकी रिपोर्ट भी शिक्षा अधिकारियों ने निदेशालय को भेजी। मगर आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये है कक्षा पहली से बारहवीं तक बच्चों के बस्ते का वजन निर्धारित
कक्षा बस्ते का वजन
पहली से दूसरी डेढ़ किलोग्राम
तीसरी से पांचवीं दो से तीन किलोग्राम
छठी से सातवीं चार किलोग्राम
आठवीं से नौंवी साढ़े चार किलोग्राम
दसवीं से बारहवीं पांच किलोग्राम
एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लगाएं
हमने सभी निजी स्कूलों को हिदायतें दी हैं कि वे एनसीईआरटी की निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकें कक्षावार लगाएं। इसके अलावा सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी सख्त निर्देश हैं कि वे अपने खंड के अधीन आने वाले निजी स्कूलों का निरीक्षण कर बस्ते के वजन की जांच करें। कोई भी निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों व अभिभावकों पर नहीं थोप सकता है। ऐसा करने वालों पर विभागीय कार्रवाई होगी।
-रामअवतार शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।