बहल (भिवानी)। मंढोली कलां गांव में एक व्यक्ति ने फर्म बनाकर किसानों की असल से ज्यादा जमीन दिखाकर ड्रिप इरिगेशन के नाम पर धोखाधड़ी से सरकार से ज्यादा अनुदान राशि हड़प ली। उक्त आरोपी ने पटवारी द्वारा जमीन दस्तावेज में ओवरराइटिंग कर जमीन को असल से ज्यादा दिखाकर हेराफेरी की है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की शिकायत पर पुलिस ने दो किसानों के अलावा बागवानी विभाग के एचडीओ, फील्डमैन और कंपनी के इंजीनियर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
मुुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक कार्यालय से मिली शिकायत के अनुसार मंढोली कलां निवासी सोमबीर ने एक फर्म बनाकर किसानों की जमीन दस्तावेज में हेराफेरी कर ड्रिप इरिगेशन के तहत दी जाने वाली अनुदान राशि में जालसाजी की है। आरोप है कि किसान अनुदान राशि के लिए पटवारी द्वारा जारी रिपोर्ट को अनुदान के लिए विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करते समय उसे बदल दिया और असल जमीन की जगह ज्यादा जमीन दिखाकर लाखों रुपये की ज्यादा अनुदान राशि हड़प ली है। आरोप है कि किसान ने वर्ष 2019-20 में अपनी 3 एकड़ जमीन को 13 एकड़ दिखाकर करीब चार लाख रुपये, जबकि एक अन्य किसान की 7 एकड़ जमीन को 17 एकड़ दिखाकर गलत तरीके से करीब पांच लाख चालीस हजार रुपये की अनुदान राशि हासिल की है।
इस तरह की रहती है प्रक्रिया
असल में बागवानी विभाग द्वारा किसानों को पानी बचाने के लिए ड्रिप इरिगेशन तकनीक से सिंचाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार किसानों को ड्रिप इरिगेशन पर 85 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। योजना से जुड़ने वाले किसान को विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन फार्म अप्लाई करना होता है और पटवारी से मिली जमीन की रिपोर्ट को भी खुद ही अपलोड करना होता है। अपलोड करने के बाद बागवानी विभाग द्वारा ड्रिप कंपनी का इंजीनियर, बागवानी विभाग के दो अधिकारी व आवेदनकर्ता किसान की एक कमेटी गठित की जाती है, जो कि किसान द्वारा किए गए आवेदन के अनुसार वस्तुस्थिति का भौतिक निरीक्षण करती है। इस कमेटी में रेवेन्यू विभाग को शामिल नहीं किया जाता है। भौतिक निरीक्षण के बाद बागवानी विभाग द्वारा इसकी सूचना चंडीगढ़ मुख्यालय को भेजी जाती है, जिसके आधार पर किसान के खाते में अनुदान राशि भेजी जाती है।
पटवारी की असल रिपोर्ट जमा न होने से होती है गड़बड़ी
मंढोली कलां गांव में उजागर हुई इस गड़बड़ी के बाद अगर जिले में ड्रिप इरिगेशन अनुदान राशि की जांच की जाए तो और भी गड़बड़ी सामने आ सकती है। मामले में यह बात सामने आई है कि पटवारी किसान को जमीन की पैमाइश की जो रिपोर्ट देता है। वह केवल विभाग की वेबसाइट पर अपलोड ही की जाती है। उसकी कॉपी न तो हॉर्टिकल्चर विभाग के पास जमा होती है और न ही इसका पटवारी के पास कॉपी देने के बाद कोई रिकॉर्ड रखा जाता है। इसके अलावा आवेदन मिलने के बाद भौतिक निरीक्षण के लिए जो कमेटी बनती है उसमें भी पटवारी को शामिल नहीं किया जाता है। जिसकी वजह से किसान द्वारा अपलोड की गई पटवारी की रिपोर्ट व भौतिक निरीक्षण कमेटी की रिपोर्ट को आधार मानकर ही राशि जारी कर दी जाती है।
इनके खिलाफ केस दर्ज
पुलिस ने मामले में बागवानी विभाग के एचडीओ प्रमोद कुमार, फील्डमैन अजय कुमार, ड्रिप इरिगेशन कंपनी के इंजीनियर शिशुपाल के अलावा दो नामजद किसानों सोमबीर व उदेसिंह के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।