भिवानी। कैंसर की बीमारी जिले के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। समय पर इलाज मिल जाए तो इस बीमारी को हराया जा सकता है। आज राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस है।
नागरिक अस्पताल में सुविधा के अभाव के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार की कमान संभाली हुई है। नागरिक अस्पताल में कैंसर के मरीजों की निशुल्क जांच और ऑपरेशन की सुविधा है। वहीं दूसरी ओर कम जागरूकता के कारण लोग कैंसर के प्रति गंभीर नहीं हैं, जिसकी वजह से वे दूसरी या फिर तीसरी स्टेज में चिकित्सक के पास चेकअप के लिए पहुंच रहे हैं। जिसकी वजह से चिकित्सकों का उपचार ऑपरेशन या फिर हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
अस्पताल की ओपीडी में सर्जन, फिजिशियन, ईएनटी रोग विशेषज्ञ वर्ष भर में 350 से 380 मरीजों में गांठ होने के कारण उन्हें कैंसर की जांच की सलाह दे रहे हैं, जिनमें से हर साल 35 से 38 यानी 10 फीसदी कैंसर ग्रस्त मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है।
जिले में कैंसर के फिलहाल करीब 300 मरीज हैं। कैंसर ग्रस्त मरीज नागरिक अस्पताल, पीजीआईएमएस रोहतक सहित निजी अस्पतालों से उपचार ले रहे हैं। जिले में कैंसर से ग्रस्त कुछ मरीजों की मौत भी हो चुकी है, मगर उसकी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में स्थायी पुष्टि नहीं है। वहीं विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता और यह धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे में विशेषतौर पर महिलाओं को 35 साल की आयु के बाद चेकअप जरूर करवाना चाहिए। जिले में ब्रेस्ट कैंसर, तंबाकू से होने वाले मुंह व गले के कैंसर के काफी मरीज हैं।
नागरिक अस्पताल में निशुल्क जांच की सुविधा
कैंसर की जांच के लिए नागरिक अस्पताल में निशुल्क जांच की सुविधा है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार मरीज अस्पताल के ब्लड बैंक में जाकर इसकी जांच करवा सकते हैं। कैंसर की जांच के लिए एफएनएसी जांच की जाती है। एफएनएसी (फाइन निडिल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) बारीक सूई से गांठ की भीतरी तहों को कुरेदकर वहां हुई कोशिकाओं को उसी सूई से खींचकर निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप से उसकी जांच की जाती है। बेहद छोटी या अस्पष्ट गांठों के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या सीटी स्कैन गाइडेड एनएनएसी की जाती है।
रोडवेज पास के रूप में बना सहारा
जिले के मरीजों को कैंसर के उपचार के लिए पीजीआईएमएस रोहतक जाता पड़ता है। मरीजों के लिए रोडवेज सहारा बना है। कैंसर मरीजों के बस पास बनाए जा रहे हैं। रोडवेज की ओर से कैंसर मरीजों के कीमोथैरेपी के लिए 150 किलोमीटर तक की दूरी के पास बनाए जाते हैं। फिलहाल करीब 300 मरीजों के पास बनाए गए हैं। एक इनके साथ केयर टेकर के रूप में जा सकता है। पास कीमोथैरेपी की तिथि के दिन ही मान्य है।
क्या है कीमोथैरेपी
कैंसर का पता लगने के बाद बायोप्सी की जाती है। ऑपरेशन कर कैंसर वाले हिस्से या गांठ को निकालना ही बायोप्सी है। कैंसर का पता लगने के बाद उसके इलाज में कीमोथैरेपी अहम है। यह कैंसर के प्रभाव को कम करने के लिए दी जाती है। हरेक तरह के कैंसर मरीज को कीमोथैरेपी नहीं दी जा सकती। कुछ केसों में रेडियोथैरेपी दी जाती है, ताकि शरीर में कैंसर के ऊतक को कम किया जा सके। (संवाद)
कैंसर से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी
कैंसर का समय पर पता चलने का बाद उसका उपचार संभव है। नागरिक अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त पांच मरीजों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। फिलहाल एक महिला मरीज अस्पताल के वार्ड में दाखिल है, जिसका उपचार चल रहा है। कैंसर से बचाव के लिए समय-समय पर चेकअप करवाना जरूरी है। कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता और यह धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे में सतर्कता का परिचय देते हुए समय पर उपचार करवाने के लिए चिकित्सक से चेकअप जरूर करवाएं। कैंसर के मरीज के उपचार के लिए कीमोथैरेपी, रेडियोथैरपी और सर्जरी की जाती है, यह मरीज की हालत में निर्भर होता है।
- डॉ. रमेश लांबा, जनरल सर्जन, नागरिक अस्पताल।
निशुल्क बस पास व्यवस्था
जिले के कैंसर मरीजों के लिए रोडवेज बस में निशुल्क पास की व्यवस्था की हुई है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा समय-समय पर मरीजों को बस पास उपलब्ध करवाए जाते हैं। कैंसर से बचाव को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग समय-समय अभियान चला रहा है। कैंसर से बचाव के लिए समय पर जांच करवा कर चिकित्सक से उपचार ले सकते हैं।
- डॉ. विनोद पंवार, डिप्टी सिविल सर्जन।