भिवानी। गांव खरक कलां में शनिवार को ब्राह्मण खाप 12 की बैठक में समाज की एकजुटता, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण में ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की गई। बैठक में पहाड़ी माता मंदिर प्रकरण में गिरफ्तार आरोपी द्वारा स्वयं को आशीष शर्मा बताए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है।
बैठक की अध्यक्षता ब्राह्मण खाप 12 के प्रधान सुरेश शर्मा ने की जबकि मंच संचालन रामकिशन शर्मा ने किया। बैठक में खाप के गणमान्य प्रतिनिधियों ने समाज की वर्तमान स्थिति और उसके गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
प्रधान सुरेश शर्मा, द भिवानी रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान रामकिशन शर्मा, सतबीर कौशिक, पूर्व सरपंच चतुर्भुज शर्मा तथा राजेश अत्री ने कहा कि कुछ लोग स्वार्थवश समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास करते हैं लेकिन इतिहास में दर्ज ब्राह्मण समाज की देशभक्ति और त्याग की गाथाओं को कभी नहीं मिटाया जा सकता।
उन्होंने पहाड़ी माता मंदिर में चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी द्वारा स्वयं को आशीष शर्मा बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोपी ने पुलिस प्रशासन और आमजन को गलत जानकारी देकर ब्राह्मण समाज को बदनाम करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि आरोपी का वास्तविक नाम आशीष कुमार है और वह पिछड़ा वर्ग से संबंध रखता है। उन्होंने कहा कि बरामद सामान और मामले की जांच से स्पष्ट है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया जिसकी ब्राह्मण समाज निंदा करता है। बैठक में मुख्य रूप से रामकिशन शर्मा, पंडित चतुर्भुज (पूर्व सरपंच), सतीश बामला तथा रामअवतार (पूर्व चेयरमैन, नौरंगाबाद) सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पंडित नेकीराम शर्मा के राष्ट्रप्रेम को किया याद
बैठक के दौरान कलिंगा निवासी राजपाल शर्मा ने कहा कि क्षेत्र के महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकीराम शर्मा को आजादी के आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन देने का प्रलोभन दिया था ताकि वे अंग्रेजों के खिलाफ बोलना बंद कर दें। उन्होंने कहा कि पंडित नेकीराम शर्मा ने देशहित को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि उन्हें चंद टुकड़े नहीं, बल्कि पूरा हिंदुस्तान चाहिए। राजपाल शर्मा ने कहा कि उनके इसी राष्ट्रप्रेम और महान व्यक्तित्व को नमन करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी स्वयं खरक कलां गांव पहुंचे थे।