जाट आरक्षण की लंबित पड़ी मांगों को लेकर पांच जून से गांव अटेला में शुरू होने वाले धरने की सुगबुगाहट के चलते प्रशासनिक खेमा अलर्ट हो गया है। बुधवार को रेस्ट हाउस में पुलिस कप्तान ने प्रशासनिक अमले सहित खाप पदाधिकारियों एवं क्षेत्र के मौजिज लोगों के साथ बैठक आयोजित की। शांति सभा के नाम से आयोजित बैठक में पुलिस कप्तान ने प्रशासन के तीखे तेवरों से जाट नेताओं को पहले ही अवगत करवा दिया। साथ ही चेतावनी दी कि इस बार दादरी क्षेत्र सरकार की नजर में संवेदनशील है और लॉ एंड ऑर्डर से खिलवाड़ होने पर पुलिस किसी को नहीं बख्शेगी।
पुलिस कप्तान प्रतीक्षा गोदारा बुधवार सुबह करीब 11 बजे चरखी दादरी रेस्ट हाउस में पहुंची। यहां पहले से ही मौजूद विभिन्न खापों के प्रतिनिधियों सहित अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व अन्य मौजिज लोगों के साथ प्रस्तावित धरने को लेकर मंथन किया। इस दौरान एसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पिछली दफा जो भी पुलिस चूक के चलते उपद्रव हुआ इस बार कतई नहीं होने दिया जाएगा। सड़क मार्ग व रेलवे ट्रैक जाम करने वालों को किसी भी कीमत पर पुलिस नहीं बख्शेगी। पुलिस न तो मामले दर्ज करने और न ही इन मामलों के आरोपियों की गिरफ्तारी करने में अपने कदम पीछे खींचेगी। लॉ एंड ऑर्डर को ठेस पहुंचाने वाले जिस भी व्यक्ति के खिलाफ सबूत मिलेगा उस पर कार्रवाई की जानी तय है। एसपी ने कहा कि अगर प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई जगह के अलावा अन्य किसी स्थान पर धरना दिया जाता है तो उसे भी नाजायज माना जाएगा।
प्रस्तावित धरने को लेकर मतभेद नजर आते ही उठकर चल दी एसपी
एसपी गोदारा की चेतावनी के बाद अटेला में धरना देने को लेकर हुए विचार-विमर्श के बाद जाट नेताओं में ही आपसी तकरार हो गई। किसी ने अटेला में धरना देने को सही मानते हुए अपना समर्थन दिया तो कुछ ने इस पर विरोध भी जताया। इस दौरान इनमें आपसी तकरार होते देख एसपी प्रतीक्षा गोदारा उठकर चल पड़ी। इसके बाद कुछ जाट नेताओं के साथ उन्होंने बंद कमरे में गुफ्तगू भी की। बाद में बाहर आए नेताओं ने चाय पीने की बात कहते हुए इस बातचीत को साझा करने से इंकार कर दिया।