फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरओ वाटर: शुद्धता की गांरटी नहीं

Mon, 11 Apr 2016 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
अगर आप आरओ प्लांट का पानी पी रहे है तो सावधान हो जाइये। यहां पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं। शुद्धता के नाम पर अधिकतर आरओ प्लांट संचालक लोगों को चूना लगा रहे हैं। अधिकतर आरओ प्लांट संचालक जमीनी पानी सप्लाई कर रहे है जिसमें टीडीएस, हार्डनेस, फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसके अलावा अधिकतर आरओ प्लांट पानी को फिल्टर करने की बजाए सिर्फ ठंडा बनाकर सप्लाई कर रहे हैं और लोगों को लूट रहे हैं। पिछले साल लिए सैंपलों में 30 से 35 फीसदी सैंपल फेल रहे। बावजूद इसके आरओ प्लांट संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिलहाल 50 आरओ प्लांट से करीब आठ हजार कैंपर पानी सप्लाई हर रोज हो रहा है, जिसे आरओ का शुद्ध पानी मानकर लोग पी रहे है।
विज्ञापन


गर्मी शुरू होने के साथ ही आरओ प्लांट से पानी सप्लाई का खेल शुरू हो गया है। पानी की डिमांड चार गुणा तक बढ़ गई है। जिन दुकानों, प्राइवेट कार्यालयों में दो माह पहले तक बमुश्किल एक पानी का कैंपर प्रयोग होता था वहां अब तीन-चार भी कम पड़ रहे है। पानी की मांग बढ़ने के साथ पानी के आरओ प्लांट का धंधा भी जोरों पर है। अलग-अलग आरओ प्लांट संचालक 15 से 25 रुपये प्रति कैंपर पानी सप्लाई कर रहे है।
शुद्धता के दौरान जाया होता है आधा पानी
आरओ प्लांट में पानी प्योर करने के दौरान आधा पानी वेस्ट हो जाता है। यानी यदि एक हजार लीटर पानी को आरओ प्लांट मशीन में डाला जाता है तो पांच सौ लीटर ही पानी शुद्ध पीने लायक मिलता है। बाकी पांच सौ लीटर बेकार हो जाता है। मगर अधिकतर आरओ प्लांट संचालक इस वेस्ट पानी जो कि पीने लायक नहीं है, इससे भी कमाई करते है और सिर्फ ठंडा कर कैंपरों में सप्लाई किया जाता है। आरओ प्लांट में पानी साफ करने के लिए आरओ मशीन होती है और पानी ठंडा करने के लिए एसी लगाये जाते है।
विज्ञापन


सैंपल फेल, फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी कमाल है। पिछले कुछ वर्षों में पानी के अनेक सैंपल लिए गए। आरओ प्लांट के भी सैंपल लिए गए। 30 फीसदी से अधिक फेल भी पाए गए। इसके बावजूद आज तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों व संबंधित विभाग को लिखा जाता है।

टीडीएस 1800, हार्डनेस, फ्लोराइड भी खतरनाक
शहर के जमीनी पानी में टीडीएस करीब 1800 एमजी, फ्लोराइड डेढ़ एमजी से अधिक, कैल्शियम भी अधिक। यह सब एक आरओ प्लांट के पानी के सैंपल की जांच में सामने आया। ऐसे में यह पानी किसी भी हालत में पीने लायक नहीं है और पीने वाले का पेट खराब हो सकता है। आरओ प्लांट से धड़ल्ले से बिना किसी जांच व बिना किसी रोक-टोक के पानी सप्लाई किया जा रहा है।
पानी में कौन से तत्व कितनी मात्रा में होने चाहिए
तत्व                                मात्रा
टीडीएस                        500-1500 एमजी
हार्डनेस सीएसीओ3        300-500 एमजी
कैल्शियम                    75-200 एमजी
मैग्रेशियम                    30-100 एमजी
एल्कालिनिटी                200-600 एमजी
सल्फेट                    200-400 एमजी
फ्लोराइड्स                1.0-1.5 एमजी
नाइट्रेट                    45 एमजी
पीएच                    6.5- 8.5
* इनमें से कोई भी तत्व निर्धारित मात्रा से अधिक है तो पानी पीने लायक नहीं है।

उल्टी-दस्त, हैजा का खतरा
भिवानी के जमीनी पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस, हार्डनेस, सल्फेट काफी अधिक है। फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, हार्डनेस आदि अन्य तत्वों की अधिक मात्रा के कारण पेट संबंधित बीमारियां, उल्टी-दस्त, हैजा, पीलिया आदि बीमारियां होती है। फ्लोराइड की मात्रा कुछ क्षेत्रों में काफी अधिक है। कुछ जगह फ्लोराइड पांच से छह एमजी तक है। इसी प्रकार टीडीएस की मात्रा भी अनेक जगह 25 सौ, तीन हजार, कहीं इससे भी ज्यादा है। फ्लोराइड के कारण दांतों में पीलेपन, बाल झड़ने की समस्या बढ़ती है। वहीं हड्डियां भी कमजोर होती है। जिस कारण कमर दर्द, घुटनों में दर्द की समस्याएं होती है।

ये पिछले साल के सैंपलों की स्थिति
माह        सैंपल        पास        फेल
मई        15        12        03
जून        22        16        06
जुलाई        50        34        16

कार्य में व्यस्तता के चलते सैंपलिंग का अभियान शुरू नहीं हुआ है। अगले सप्ताह से जांच शुरू की जाएगी। जिसके सैंपल फेल होंगे उनके खिलाफ उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा।
डॉ. वेद कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग

पानी में फ्लोराइड, हार्डनेस, टीडीएस, पीएच अधिक हो तो वह पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शहर में अनेक जगह जमीनी पानी में फ्लोराइड, हार्डनेस ज्यादा है। कुछ जगह पानी अच्छा भी है। हमारे पास कोई सैंपल जांच के लिए आता है तो हम जांच करके बताते हैं।
विज्ञापन

संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें