फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाह रे भांजे पप्पू, तूने तो चमका दिया मंढोली कलां का नाम

Fri, 16 Sep 2016 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
मेडल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
रियो पैरालंपिक में स्वर्णिम छलांग लगाकर विश्व रिकार्ड बनाने वाले देवेन्द्र झाझड़िया के साथ मंढोली कलां गांव का तीरवाला जोहड़ भी सुर्खियों में आ गया है। यह वही जोहड़ है, जहां देवेंद्र ने अपने भाले को धार दी थी। देवेन्द्र का मंढोली कलां में लगातार आना जाना रहा है। अपने लाडले भांजे की शानदार उपलब्धि पर मंढोली कलां गांव में जश्र का माहौल है और हर जन खुशी के आलम में डूबा हुआ है। मंढोली कलां में लोग उसे देवेंद्र कम पप्पू के नाम से ज्यादा जानते हैं।

रियो पैरालंपिक में 12 साल बाद अपने ही रिकार्ड को ध्वस्त कर जब देवेन्द्र ने गले में सोने का तमगा पहना तो मंढोली कलां गांव के उसके यार-दोस्त चहक उठे। देवेन्द्र के करीबी दोस्त नरेन्द्र, संदीप, मंजीत, कुलदीप, पवन ने बताया कि देवेन्द्र का अक्सर मंढोली में आना जाना होता था। वह यहां दो-दो महीने तक रुकता था। जितने दिन भी रुकता तो वह प्रेक्टिस के लिए तीरवाला जोहड़ जाता और वहां घंटों तक भाला फेंकने की प्रेक्टिस में लगा रहता था। इसके अलावा गांव में जब भी क्रिकेट, कबड्डी के टूर्नामेंट होते तो देवेन्द्र सूचना मिलते ही फौरन चला आता। एथेंस पैरालंपिक मंढोली कलां के अनेक युवाओं ने देवेंद्र से ट्रेनिंग ली है।
विज्ञापन


मूंग चावल की खिचड़ी का शौकीन है देवेंद्र
देवेंद्र वैसे तो सभी प्रकार के फल और सब्जियां खाता है। पर, मामी के हाथ की बनी मूंग चावल की खिचड़ी उसका पसंदीदा व्यंजन है। देवेंद्र की मामा हवासिंह जेलदार तथा मामी बीरमति ने बताया कि उसे कभी लगा ही नहीं कि देवेन्द्र उसकी ननद का लड़का है। वह हमेशा उससे मां जैसा व्यवहार करता और वह उससे बेटे जैसा। जब मैं उससे पूछती कि बेटा आज क्या खाएगा तो उसका जवाब होता कि मामी मूंग चावल की खिचड़ी बना लो। देवेन्द्र के मामा के लड़के रामनिवास, आजाद, राजपाल, प्रकाश, सतपाल ने बताया कि देवेन्द्र मेहनती, मिलनसार है।
विज्ञापन


अधूरी रह गई हरियाणा से खेलने की ललक
देवेंद्र वैसे तो मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ तहसील के रतनपुरा, डोकवा गांव के समीप झाझड़िया की ढाणी गांव का है। पर, उसे मंढोली कलां में अपनी ननिहाल से विशेष लगाव रहा है। पैरालंपिक जाने से पहले उसने यह भरसक प्रयास किया कि वह ट्रांसफर लेकर हरियाणा की तरफ से खेले। इसके लिए उसने प्रशासनिक स्तर पर कुछ तैयारियां पूरी भी कर ली थी लेकिन बाद में उसे बताया कि पैरालंपिक खेलों तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें