पिछले महीने नक्शा फीस बढ़ाई तो आवेदनों पर ही रोक लग गई। नक्शा फीस में कई गुणा बढ़ोतरी के बाद नक्शा फीस के लिए कोई आवेदन नहीं आया। कुछ लोग अत्यधिक फीस से घबरा गए तो कुछ को नप कर्मचारियों सलाह दी कि बढ़ी फीस पर रोक लग सकती है। अब बढ़ी दरों पर रोक की नोटिफिकेशन भी आ गई है और अब पुरानी दरों पर ही नक्शे पास होंगे। नोटिफिकेशन आने के बाद अब फिर से आवेदन आने लगे है।
नप की आय का एक स्त्रोत नक्शों के बदले प्राप्त होने वाली फीस भी है। मगर पिछले महीने नक्शा शुल्क में डेवलपमेंट फीस में कई गुणा की बढ़ोतरी ने नप की इस आय पर भी ब्रेक लगा दिए। बढ़ी फीस के कारण आवेदन ही नहीं आए। पिछले महीने प्रदेश सरकार ने नक्शा पास करवाने के दौरान लगने वाले डेवलपमेंट चार्ज को कई गुणा बढ़ा दिया था। कामर्शियल भवन के दाम 15 सौ रुपये प्रति गज व रिहायशी मकान के 750 रुपये प्रति गज कर दिए गए थे। जबकि पहले ये 120 रुपये प्रति गज रिहायशी मकान और कमर्शियल भवन के करीब छह सौ रुपये प्रति गज थे। अचानक डेवलेपमेंट चार्ज में छह गुणा तक की बढ़ोतरी के समाचार को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। बाद में इसका विरोध हुआ। जिसके चलते सरकार ने इस निर्णय पर रोक लगाई। जानकारी के अभाव में लोग बढ़ी फीस के चलते आवेदन ही नहीं कर रहे। उनके मन में अब भी शंका है कि फीस घटी है या नहीं। मगर अब नगर परिषद कार्यालय में इस बारे में नोटिफिकेशन आ चुकी है और पुरानी दरों पर ही नक्शे पास होंगे।
यहां तो पास ही नहीं हो रहे नक्शे, लटके है अनेक नक्शे
सरकार ने तो नक्शे पास करवाने की बढ़ाई फीस घटा दी मगर नगर परिषद में नक्शे ही पास नहीं हो रहे। अनेक लोगों के तो छह महीने से भी ज्यादा समय से नक्शे पास नहीं हो रहे। लोग चक्कर काट रहे है। सभी को एक ही जवाब मिलता है कि अभी स्टाफ इलेक्शन ड्यूटी में व्यस्त है। करीब 250 से अधिक नक्शे पेंडिंग है।
नक्शों की फीस पर पुनर्विचार किया जाएगा। फिलहाल नई दरों पर रोक लगाई गई है और पुरानी दरों पर ही नक्शे पास होंगे। यह सरकार का फैसला है। नक्श पास कराने के लिए आवेदन आ रहे है और बिना नक्शा पास करवाये भवन निर्माण गैर कानूनी है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
मनेंद्र सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद