हलवासिया स्कूल में प्रशासक नहीं होने के बावजूद कार्यवाहक प्रिंसिपल को बर्खास्त करने को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायालय की अवमानना मानते हुए एडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही नोटिस मिलने के दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए गए है। वरना पांच हजार रुपये रजिस्ट्री के साथ जवाब देना होगा।
हलवासिया स्कूल विवाद लगातार गहराता जा रहा है। चार जुलाई को हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए समिति पदाधिकारी स्कूल पहुंचे और प्रशासक नियुक्ति के आदेश रद किए जाने के हाईकोर्ट के कागजात दिखाए। साथ ही शिक्षक गुलशन परुथी को कार्यवाहक प्रिंसिपल नियुक्त किया। फिलहाल कार्यवाहक प्रिंसिपल डा. रमाकांत ने समिति पदाधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करवाया। समिति के तीन पदाधिकारियों शिव शंकर कसेरा, राज कुमार सैनी, रवींद्र सैनी के खिलाफ सिविल लाइन थाना में मुकदमा दर्ज करवाया।
प्रशासक व एडीसी ने शिक्षक गुलशन परुथी को बर्खास्त कर दिया। समिति पदाधिकारियों ने इसे कोर्ट के आदेशों की अवमानना बताते हुए याचिका दायर की।
जन कल्याण ट्रस्ट के मैनेजर शिव शंकर कसेरा व राज कुमार ने बताया कि हलवासिया विद्या विहार स्कूल की समिति को सहकारी समितियों की ओर से डी रजिस्टर्ड करने की बात को हाईकोर्ट ने सही माना तो एडीसी को प्रशासक नियुक्त करने के अप्रैल 2015 के आदेश बीती तीन जून को रद किए जा चुके है। हाईकोर्ट के आदेशों के आधान पर ही ट्रस्ट ने कार्य संभाला और कंप्यूटर साइंस शिक्षक गुलशन परुथी को कार्यवाहक प्रिंसिपल नियुक्त किया। एडीसी ने प्रशासक नहीं होने के बावजूद चार जुलाई को गुलशन परुथी को बर्खास्त कर दिया। जिसके बाद ट्रस्ट ने कोर्ट की अवमानना की याचिका दायर की। इसी पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने एडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें नोटिस मिलने के दो सप्ताह के अंदर-अंदर जवाब देने के निर्देश दिए गए है। साथ ही निर्धारित समयावधि में जवाब नहीं देने पर पांच हजार रुपये रजिस्ट्री के साथ जवाब देना होगा।
पिछले वर्ष से चल रहा है विवाद
16 अप्रैल 2015 को सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने एडीसी को हलवासिया विद्या विहार स्कूल का प्रशासक नियुक्ति किया था। साथ ही प्रबंध समिति के पदाधिकारियों की एंट्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हिंदी प्राध्यापक रमाकांत को कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई। तभी से विवाद चल रहा है।
नहीं मिला कोई नोटिस
एडीसी धीरेंद्र खड़गटा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के बारे में बताया कि अभी उन्हें इस तरह का कोई नोटिस नहीं मिला है।