भिवानी। हामनै के बेरा था नू बणैगी...इसतै आच्छा तौ भाई नै ए बुला लेंदे, उरै तो किमे कौनी आंदा, बस खातर दो घंटे बैठये हौगे, इब ताई कौनी आई, ना उरै पीण न पाणी सै, न बैठण न जगा। यह कहना है उन महिलाओं का जो रक्षाबंधन पर्व से एक दिन पहले अपने भाई के घर जाने के लिए आतुर थी। रक्षाबंधन पर्व से पहले बहनों को भाई के घर पहुंचने से पहले मुश्किलों के सफर से गुजरना पड़ा। बुधवार दोपहर बाद बहनों को उमस भरी गर्मी में रोडवेज बसों के अंदर सीट तक नसीब नहीं हुई। वहीं भीड़ के अंदर महिलाओं को एक पैर पर खड़े रहकर भाई के घर पहुंचना पड़ा। बस स्टैंड पर भी सुबह 11 बजे तक महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ जुट गई थी। लेकिन उनका मुफ्त सफर दोपहर 12 बजे के बाद ही रोडवेज बसों में शुरू हुआ। ऐसे में महिलाओं को बसों के इंतजार में डेढ़ से दो घंटे तक बिताने पड़े।
भिवानी बस स्टैंड का नजारा ये था कि महिलाओं और बच्चों को रोडवेज बसों के अंदर गेट से नहीं, बल्कि खिड़की से अंदर दाखिल होना पड़ा। बुधवार को पहले दिन करीब चार हजार महिलाओं ने रोडवेज बसों में सफर किया। रोडवेज अधिकारियों का दावा है कि बुधवार को भिवानी बस स्टैंड से 95 बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर किया गया। लेकिन कई रूट ऐसे थे, जहां पर रोडवेज की बसें डेढ़ से दो घंटे की देरी से पहुंची। ऐसे में बूथों पर महिलाएं थका देने वाला इंतजार करती रहीं। महिलाओं के साथ छोटे बच्चे उमस भरी गर्मी में परेशान हुए। रक्षाबंधन को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने सभी कर्मचारियों की छुट्टी भी रदद कर दी। जिसके बाद बुधवार को 143 रोडवेज परिचालक व 126 चालक ड्यूटी पर तैनात रहे। इसी तरह करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारी बस स्टैंड की व्यवस्था संभालने में जुटे रहे। बस स्टैंड पर सात एडवांस बुकिंग काउंटरों पर भी टिकट की व्यवस्था थी, मगर महिलाओं व बच्चों के लिए दोपहर बाद कोई टिकट नहीं काटी गई, क्योंकि उनका बसों में मुफ्त सफर शुरू हो गया था।
परिवहन समिति की बसों के थमे पहिये
रक्षा बंधन पर्व से एक दिन पहले ही परिवहन समिति की रूट परमिट बसों के अधिकतर पहिये थमे रहे, जबकि रोडवेज बसों की व्यवस्था भी बिगड़ गई। अधिकतर प्राइवेट बसें दोपहर तीन बजे बाद रूट पर थमी रही, जिसकी वजह से हालात बिगड़ गए। क्योंकि महिलाओं को मुफ्त सफर उन्हीं पर भारी पड़ गया। भिवानी से रोहतक, भिवानी से पानीपत, भिवानी से चंडीगढ़, भिवानी से महम, भिवानी से जींद, भिवानी से हांसी, भिवानी से अन्य ग्रामीण रूटों पर जाने के लिए भी बसें एक से डेढ़ घंटे बाद मिली, जबकि इन रूटों पर हर पांच से सात मिनट बाद रोडवेज की सामान्य दिनों में सर्विस दी जा रही है।
झोझू तै उरै ताई आगी, इब आगै जाण नै बस कोनी मिली
बस स्टैंड पर रोडवेज बस का इंतजार कर रही बुजुर्ग महिला सावित्री का कहना है कि झोझू तै उरै ताई आगी, इब आगै जाण न बस कौनी मिली। मैं अपणै भाई कै घर जाऊं थी। गर्मी में उरै बैठया बी नी ज्यांदा।
-सावित्री, बुजुर्ग महिला।
सबेरै बहल तै उरै ताई किसे तरियां तो आ गी इब पानीपत ज्याण खातर, दो घंटे तै उरै बैठी सूं, कोए बस कौनी आई। मैरे साथ छोटे बालक भी सैं। इब दूर ज्याणा सै, गर्मी मैं उरै बैठे बैठे भी बैहाल हौ रै सां।
- निर्मला, बहल क्षेत्रवासी।
पहल्या खरक बस स्टैंड पै बैठी बस का इंतजार करदी रैई, इब उरै भ्याणी बस स्टैंड पर एक घंटे तै बैठी सूं, हिसार जाण नै कोई बस कौनी आई। जिब भी कोए बस बस स्टैंड पै आवै सै तो भीड़ उस पै टूट पड़ै से देख कै भी जी घबरावै सै।
- संतोष, खरक कलां वासी।
परिवहन समिति की अधिकतर बसों ने तीन बजे बाद बसों का संचालन नहीं किया, इस संबंध में आरटीए को संगठन की तरफ से रिपोर्ट भेजी गई है, प्राइवेट बसें नहीं चलने और त्योहार पर महिलाओं की भीड़ ज्यादा होने की वजह से रोडवेज की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हम इस संबंध में परिवहन समिति बस संचालकों की मनमानी की निंदा करते हैं और कार्रवाई की मांग करते हैं।
- प्रदीप दुग्गल, डिपो प्रधान
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन भिवानी।
रक्षाबंधन पर्व पर बुधवार दोपहर 12 बजे से ही महिलाओं व छोटे बच्चों के लिए मुफ्त सफर शुरू किया गया है, जो वीरवार को पूरा दिन व शुक्रवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। सभी कर्मचारियों की छुट्टी रद्द कर ड्यूटी लगाई गई है। 95 बसों को ऑनरूट कर महिलाओं को बेहतर परिवहन सुविधा देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। डिपो में बसों की कमी है, मगर फिर भी व्यवस्था बनाने की कोशिश है। त्योहार पर महिलाओं की ज्यादा भीड़ बढ़ गई है।
- कुलदीप पांचाल, संस्थान प्रबंधक
भिवानी बस स्टैंड।