भिवानी। 37 साल पहले आबाद हुआ शहर का सेक्टर 13 व 23 साढ़े चार हजार मकानों में रहने वाले 30 हजार लोगों की आबादी को आज भी जन सुविधाएं नहीं दे पाया है। करीब 12 साल पहले करोड़ों का बजट खर्च कर सेक्टर 13 व 23 के लिए अलग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया। सीवरेज के गंदे पानी की निकासी के लिए दो पंपिंग स्टेशन भी बने, मगर बारिश के पानी का अब तक कोई स्थायी इंतजाम नहीं हुआ।
थोड़ी सी बारिश में ही शहर का पॉश इलाका सेक्टर डूब रहा है। जिसकी वजह से सीवर व्यवस्था भी चरमरा गई है। बरसाती चैनल अतिक्रमण की वजह से गायब हो चुके हैं। बारिश से हुए जलभराव में जहरीले जीवों का खतरा मंडरा रहा है वहीं मच्छरों ने भी जमा पानी में डेरा डाल दिया है। जिससे सेक्टरवासियों की सेहत पर भी डंक का डर बना है।
1985 में आबाद हुआ शहर का पॉश इलाका सेक्टर 13 और 23 को अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के साथ-साथ नगर परिषद भिवानी के अधीन भी कर दिया है। 2016 में नगर परिषद के पास सेक्टर के अंदर बरसाती पानी की निकासी, सड़कों के रखरखाव और सफाई की व्यवस्था आ गई थी। मगर इस व्यवस्था के बाद भी सेक्टर की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। विभाग के अधिकारी ठेकेदारों के भरोसे हाथ पर हाथ धर बैठ गए और सेक्टर में भी समस्याओं का अंबार लग गया। 2009-10 में सेक्टर के लिए अलग से करीब 44 करोड़ की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मिला। जिसके बाद 2017 में करीब 17 करोड़ के बजट से सेक्टर में मैन पंपिंग हाउस भी बना दिया। इसके बावजूद भी सेक्टर में सीवर ठप और बारिश के पानी की निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनी।
तीन साल से कष्ट निवारण समिति की बैठक में गूंज रहा मुद्दा
द रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान रामकिशन शर्मा पिछले तीन साल से सेक्टर में मूलभूत सुविधाओं के लिए जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी मामले उठाते आ रहे हैं। मगर कोई समाधान नहीं हुआ है। मंत्री से लेकर विधायक तक आदेश दे चुके हैं, मगर अधिकारी भी सिर्फ आश्वासन देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
ग्रीन बेल्ट बन चुकी हैं दरिया, खाली प्लाट बने जोहड़
हम सिर्फ कहने को ही सेक्टर 13 न्यू हाउसिंग बोर्ड वासी हैं, लेकिन यहां ग्रीन बेल्ट दरिया बन चुकी है। खाली प्लॉट जोहड़ की तरह बरसाती पानी से लबालब भरे हैं। यहां रोजाना जहरीले जीव-जंतु घरों में घुस रहे हैं। मच्छरों ने भी डेरा डाला है। हमारी चार से पांच शिकायतें संबंधित अधिकारियों के समक्ष जा चुकी हैं, मगर कोई समाधान नहीं हुआ है।
-धनपत सांगवान, सेक्टरवासी।
हमने लाखों रुपये खर्च कर खून-पसीने से घरौंदा बनाया था, अब यहां के हालात देखकर कोई रहना नहीं चाहता है। कई लोग तो यहां मकान बेचकर जाने को तैयार हैं, मगर कोई खरीददार नहीं आ रहा है। जन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं हैं। सेक्टर के न्यू हाउसिंग बोर्ड में गलियों में भी बारिश का पानी जमा हो गया है। जिसकी कोई निकासी तक नहीं है।
सेक्टर में बरसाती चैनलों पर लोगों के अवैध कब्जे हो चुके हैं, पार्कों के अंदर भी बारिश का पानी जमा है। मकानों में भी दरारें आ गई हैं। जहरीले जीव-जंतु भी बारिश के पानी में पैदा हो गए हैं, जिसकी वजह से बच्चों को भी घर के अंदर भी डर लग रहा है।
-मनीष यादव, सेक्टरवासी।
सेक्टर में मच्छरों की भरमार हैं, यहां अभी तक कोई फॉगिंग तक नहीं कराई गई है। बारिश का पानी खाली प्लाटों में यहां स्थायी तौर पर जमा रहता है। जिसकी निकासी की व्यवस्था कोई भी विभाग नहीं कर रहा है। परेशानी स्थानीय लोग झेल रहे हैं।
-फूल परमार, सेक्टरवासी।
कोई भी अधिकारी अपने काम की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। शिकायतों के अंबार लगे हैं, मगर इन शिकायतों पर अधिकारी खुद ही लीपापोती कर देते हैं, जबकि धरातल पर हालात कैसे हैं, इसकी सुध कोई नहीं लेता।
-अनिल सिवाच, सेक्टरवासी।
सेक्टर की सीवर व्यवस्था बिलकुल दुरुस्त है और पंपिंग स्टेशन भी चालू है। दोनों सेक्टरों से बारिश के पानी की निकासी की जिम्मेदारी 2016 से नगर परिषद को सौंपी जा चुकी है। सेक्टर में किसी भी गली या हिस्से में सीवर का पानी कहीं जमा नहीं है।
-करुण जेई, सीवरेज शाखा, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण भिवानी।
अभी मेरे संज्ञान में ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। लेकिन फिर भी सेक्टर के अंदर जहां-जहां बारिश का पानी जमा हैं वहां पर ट्रैक्टर से पंपिंग कराकर जल्द निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी। बरसाती पानी की निकासी के लिए सेक्टर के अंदर स्थायी तौर पर भी पाइपलाइन डालकर इसका प्रबंध कराएंगे।
-सुंदर श्योराण, कार्यकारी अभियंता, नगर परिषद भिवानी।