भिवानी। भिवानी तहसील कार्यालय में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान उजागर हुईं भ्रष्टाचार की खबर सुर्खियां बनने के बाद इस मामले में उपायुक्त ने तहसीलदार से रिपोर्ट तलब की है। उपायुक्त ने तहसील कार्यालय के क्लर्क की सीट पर बैठकर रजिस्ट्री कराने वाले लोगों से अवैध वसूली करने वाले बाहरी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं।
स्टिंग में तहसील कार्यालय के रजिस्ट्री क्लर्क के कक्ष में बाहरी व्यक्ति साफतौर पर रजिस्ट्री कराने आने वालों से पैसे लेकर कुर्सी पर बैठकर काम करता दिखाई दे रहा है। तहसीलदार सुरेश कुमार ने जब रजिस्ट्री क्लर्क संदीप यादव के साथ मौके पर उस व्यक्ति को पकड़ लिया तो मीडिया के सामने खुद अनजान बनने लगे। उसकी पहचान छिपाने का भी प्रयास करने लगे। हालांकि स्टिंग में बाहरी व्यक्ति की करतूत पहले ही कैमरे में कैद हो चुकी थी। इसके बावजूद आरोपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।
भिवानी तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार लंबे अरसे से अपनी जड़ें जमा चुका है। ऐसे में तहसील कार्यालय के अंदर अधिकारियों और यहां सक्रिय दलालों और प्राइवेट व्यक्तियों की फोन की लोकेशन निकाली जाए और इसकी विस्तृत जांच कराई जाए तो पूरा भ्रष्टाचार का खेल उजागर हो जाएगा। हालांकि अधिकारी जांच के नाम पर एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में रहते हैं, जबकि कार्रवाई के नाम पर महज लीपापोती कर प्रयास रहता है। संगठन पहले ही इस मामले की मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को तथ्यों के साथ शिकायत कर चुका है। ऐसे में इस मामले को दबाने वाले अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।
-बृजपाल सिंह परमार, अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
प्रत्येक रजिस्ट्री पर खेला जा रहा एक से पांच फीसदी का खेल, सिस्टम फेल
तहसील कार्यालय में उजागर हुए भ्रष्टाचार में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक रजिस्ट्री पर एक से पांच फीसदी अवैध वसूली का खेल खेला जा रहा है, जिसके आगे पूरा सिस्टम फेल है। कच्ची पेंसिल से रजिस्ट्री पर कोड वर्ल्ड लिखे जाते हैं, जिसके हिसाब से ही रजिस्ट्री पर ऊपर का पैसा तय होता है।
कई अधिकारी भी जा चुके हैं जेल
भिवानी तहसील में भूमि की रजिस्ट्री घोटाले सहित गोलमाल उजागर हो चुके हैं, जिसमें कुछ मामलों में तो तहसील अधिकारी भी जेल की हवा खा चुके हैं। इसके बावजूद भ्रष्टाचार यहां निरंतर जारी है। हाल ही में चार भूमि की रजिस्ट्री पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। हालांकि इनकी अभी जांच चल रही है। जबकि बैप्टिस्ट चर्च भूमि घोटाले में तहसील कार्यालय के कर्मचारी और अधिकारियों को भी जेल जाना पड़ा था। अब भी ये मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। इसकी पैरवी भी स्टेट विजिलेंस को सौंपी हुई है।
मैंने भिवानी तहसीलदार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में आगे कदम उठाया जाएगा। इस मामले में स्टिंग में दिखाई दे रहे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। इसके अलावा अन्य किसी की भूमिका सामने आती है तो भी कार्रवाई होगी। -महावीर कौशिक, उपायुक्त, भिवानी।