भिवानी/बवानीखेड़ा। बवानीखेड़ा स्थित सामान्य अस्पताल बदहाली के कगार पर है। अस्पताल परिसर के कुछ हिस्से को लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अधिकारियों ने जर्जर घोषित कर दिया है। इसके बाद भी नया अस्पताल परिसर नहीं बन सका है। बारिश के समय में अस्पताल की जर्जर छतें टपकने लगतीं हैं। अस्पताल के शौचालयों की हालत भी खराब है। कस्बावासियों को नये अस्पताल का इंतजार है। कस्बावासियों ने बताया कि अस्पताल में रोजाना करीब 300 मरीज जांच करवाने पहुंचते हैं लेकिन अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से खंड और कस्बे की गर्भवती महिलाओं को हांसी या भिवानी जाना पड़ता है। कस्बे में कोई निजी अल्ट्रासाउंड मशीन भी नहीं लगी है। इसके कारण सामान्य अस्पताल से लोगों को उम्मीद है कि इस परिसर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल का निर्माण 50 साल पहले चतर्भुज लाजपतराय जनरल अस्पताल के नाम से किया गया था लेकिन अस्पताल के शुरू होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इस अस्पताल में 11 चिकित्सकों के पदों की स्वीकृति है। इसमें से एसएमओ सहित सात चिकित्सक कार्यरत हैं। इन चिकित्सकों में से अधिकतर चिकित्साधिकारी (एमओ) के पद पर काम कर रहे हैं।
चिक्तिसकों के लिए आवासीय सुविधा भी अस्पताल में नहीं बनाई गई है। इसकी वजह से आपातकालीन कक्ष में रात के समय चिकित्सक को मरीजों के पास तक आने में समय लगता है। अस्पताल में दिव्यांगों और बुजुर्ग मरीजों के लिए रेलिंग नहीं लगी है। उन्होंने बताया कि पहले भी वह अपनी मांग समय समय पर स्थानीय नेताओं के सामने रख चुके हैं लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। कस्बावासियों ने बताया कि अस्पताल को बने 45 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इसके बावजूद नगर के आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं है। गर्भवतियों को जाकर 600 से 1,700 रुपये में निजी सेंटरों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। शौचालय जर्जर हालत में है। छतों की हालात जर्जर है। संवाद