मंडियों में अब बाजरा की आवक धीमी हो गई है। इसी के साथ हैफेड अधिकारी खरीद हो चुके बाजरा का उठान कराने में जुटे हैं। अब तक 13 मंडियों में 33803.05 टन बाजरा की सरकारी खरीद हो चुकी है। शनिवार को भिवानी मंडी में 157 किसान पहुंचे। जिनका 3263 क्विंटल बाजरा मंडी में पहुंचा। जबकि ग्रामीण मंडियों में भी बाजरा की आवक धीमी हो गई है। अभी भी मंडियों में करीब डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक बाजरा पड़ा है।
बाजरा बिक्री करने के बावजूद करीब 70 फीसदी किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं। जबकि मंडियों में अब तक 43 फीसदी ही उठान हुआ है। हैफेड का दावा है कि जिन किसानों का बाजरा खरीद के बाद उठान हो चुका है। उनके खाते में भुगतान हो गया है। मगर अभी भी काफी किसान ऐसे हैं, जिनका भुगतान नहीं हुआ है।
भिवानी और चरखी दादरी की 13 मंडियों में अब तक 15062 किसानों का 33803.05 टन बाजरा की सरकारी खरीद की गई है। इसमें से 1453.75 बाजरा का उठान हो चुका है। जबकि मंडियों में अब भी 19219.30 टन बाजरा उठान होना बाकी है। मंडियों से अभी तक 43 फीसदी बाजरा ही उठान हो पाया है। यही वजह है कि 70 फीसदी किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं। कई किसानों के बैंक खातों का भी मिलान नहीं हो रहा है।
इसकी वजह से भी भुगतान अटका है। ऐसे किसानों को अब फिर से बैंक पास बुक अधिकारियों को जमा करानी होगी। वहीं मंडियों में आवक धीमी होने से खरीद में भी कमी आई है। अधिकारी कम ढेरियों को ही खरीद रहे हैं, जबकि मंडियों में अभी भी करीब डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक बाजरा खरीद के इंतजार में पड़ा है।
ये हुई है बाजरा की सरकारी खरीद
मंडी-
खरीद टन में
1. बवानीखेड़ा-
21.50
2. बहल-
1869.20
3. भिवानी-
7033.70
4. ढिगावा-
5178.95
5. ईशरवाल-
0.00
6. जूई-
7541.90
7. कैरू-
0.00
8. लोहारू-
5230.50
9. पाजू-
0.00
10. सिवानी-
267.00
11. तोशाम-
5811.80
कुल- 33803.05
तीन मंडियों में नहीं खुला खरीद का खाता
भिवानी जिले की तीन मंडियों में तो किसानों की बाजरा खरीद का खाता ही नहीं खुला। जबकि सिवानी मंडी में सबसे कम नाममात्र का बाजरा की सरकारी खरीद हुई है। किसानों का अब तक सबसे अधिक बाजरा जूई मंडी में खरीद हुआ है।
किसानों की फसल का उठान के साथ साथ भुगतान कराया जा रहा है। जिन किसानों के बैंक खाता को लेकर कोई दिक्कत है तो वे तुरंत इसे दूर कराएं ताकि उनका भुगतान संभव हो सके। मंडियों में अधिकांश किसान अपनी बाजरा की फसल बेच चुके हैं। अब आवक धीमी हो गई है।
-राजेंद सिंह, जिला प्रबंधक हैफेड, भिवानी।