फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमोनिया रिसाव : फिर खुली इंतजामों की पोल

Wed, 21 May 2014 01:29 AM IST
भिवानी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कालूवास गांव के पास चिलिंग प्लांट में सोमवार रात अमोनिया गैस के रिसाव के बाद भले ही बड़ा हादसा टल गया, लेकिन हादसे ने सुरक्षा इंतजाम की पोल खोल दी है। ऐसे हादसों से निपटने के लिए न तो फैक्ट्रियों में पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही फायर ब्रिगेड संसाधनों से लैस है। फेस मास्क और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे उपकरण चालू हालत में नहीं हैं। धुएं या गैस रिसाव की स्थिति में सिर्फ हौसलों के बूते ही लड़ना पड़ता है। संसाधनों के यह हालात तब हैं, जब शहर में ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।
विज्ञापन


शहर समेत जिले में करीब दो दर्जन फैक्ट्रियां में अमोनिया गैस का इस्तेमाल होता है। इनमें डेढ़ दर्जन आइस फैक्ट्रियां भी शामिल हैं। कायदे से इन फैक्ट्रियों में आग के साथ गैस लीकेज से बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर, स्प्रिंकलर सिस्टम, फेस मास्क होना बेहद जरूरी है। इससे इतर अधिकांश फैक्ट्रियाें में यह इंतजाम नदारद हैं। जहां लगे भी हैं, वहां सिर्फ खानापूर्ति ही हुई है। अफसरों का कोई कड़ा नियंत्रण न होने से भी फैक्ट्री मालिक इससे बेपरवाह बने हुए हैं, इसका खामियाजा फैक्ट्री कर्मचारियों, मजदूरों या आस-पास के अन्य लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

दो साल पहले भी हुआ था हादसा
चिलिंग प्लांट से अमोनिया रिसाव की घटना शहर के लिए पहली नहीं है। करीब दो साल पहले भी मध्य शहर के नया बाजार इलाके की फैक्ट्री में भी अमोनिया रिसाव हुआ था। इससे इलाके में भगदड़ मच गई थी। लोगाें की सतर्कता और फायर ब्रिगेड की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद घंटों की मशक्कत से लीकेज को बंद करने में सफलता मिली थी।
विज्ञापन


फायर ब्रिगेड के पास भी नहीं इंतजाम
फैक्ट्री प्रबंधन के साथ अग्निशमन विभाग भी ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। विभाग के पास न तो रेस्क्यू टेंडर किट है और न ही लाइफ जैकेट। ऑक्सीजन सिलेंडर भी इतना पुराना है कि जरूरत पर ही धोखा दे जाए। कर्मचारियों के पास मास्क भी नहीं है। ऐसे में उन्हें गमछे या रुमाल से मुंह ढककर गैस के बीच कूदना पड़ता है। सोमवार रात भी जवानों को ऐसा ही करना पड़ा।

नुकसानदायक है अमोनिया गैस
अमोनिया इरिटेंट गैस होती है। इसके संपर्क में आते ही त्वचा और आंखों में जलन होने लगती है और पानी निकलने लगता है। नाक से छींक आनी शुरू हो जाती है। फेफड़ों के संपर्क में आने से सांस की नलियां जकड़ जाती हैं। खराश पैदा होने से नलियों में सूजन होने का खतरा है। फेफड़ों में अमोनिया भरने से पानी रिसने पर शरीर में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है और परिणामस्वरूप व्यक्ति की मौत हो सकती है। ज्यादा समय तक अमोनिया के संपर्क में रहने से अंधापन भी हो सकता है। - डा. सुशील धमेजा, सांस और छाती रोग विशेषज्ञ

यह होने चाहिए इंतजाम
जिन फैक्ट्रियों में अमोनिया का इस्तेमाल होता है वहां एयर सर्कुलेशन अच्छी तरह होना चाहिए। मौके पर ऑक्सीजन सिलेंडर, स्प्रिंकलर सिस्टम और पर्याप्त मास्क होने चाहिए, ताकि सुरक्षा के लिए तत्काल उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमोनिया को अक्रियाशील बनाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी का भंडारण होना जरूरी है। संबंधित इलाके के लोगों को डिजास्टर मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए।

फैक्ट्री में थे पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम
चिलिंग प्लांट संचालक डा. विजय कुमार का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्लांट में हर संभव इंतजाम किए गए हैं। स्प्रिंकलर सिस्टम और मास्क की व्यवस्था है। वाल्व में मामूली खराबी आने से लीकेज हुआ था। घटना के समय बिजली न होने से इन उपकरणों का सही समय पर उपयोग नहीं हो सका। जैसे ही हमारी कोशिशें अपर्याप्त लगी तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी थी। प्लांट खुले में है और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें