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कृषि मंत्री ने टिड्डी दल के प्रजनन वाले क्षेत्रों में दिए दवा छिड़काव के आदेश

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अधिकारियों के साथ बिठ्ठन व चैहड़कलां के खेतों का निरीक्षण करते कृषि मंत्री जेपी दलाल। - संवाद - फोटो : Bhiwani
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उपमंडल के गांव बिठ्ठन और चैहड़कलां के खेतों का कृषि एवं पशुपालन मंत्री जयप्रकाश दलाल ने रविवार को निरीक्षण किया और अधिकारियों को टिड्डियों के हमले के बाद प्रजनन से पैदा हुए टिड्डियों के शिशुओं अर्थात फांका को तुरंत प्रभाव से दवा छिड़ककर नष्ट करने के आदेश दिए। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं हैं । इन्हें दवा से नष्ट किया जाएगा। उन्होंने किसानों से भी सचेत रहने और टिड्डी रूप महामारी से निपटने में प्रशासन और सरकार का पूरा सहयोग करने का आह्वान किया।
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बता दें कि करीब एक पखवाड़ा पहले उपमंडल के गांव बिठ्ठन और चैहड़कलां के खेतों में टिड्डी दल ने हमला किया और हमले के परिणाम अब आते दिखाई देने लगे हैं। जिस स्थान पर टिड्डियों ने डेरा डाला था वहां पर टिड्डियों के प्रजनन के बाद भारी संख्या में टिड्डियों के शिशु अर्थात फाका (निफ) का प्रकोप बढ़ने लगा है। अब अंडों से टिड्डियों के शिशु निकलने शुरू हो गए हैं। देहाती भाषा में टिड्डियों के इन्हीं शिशुओं का फाका (निफ) कहते हैं। पिछले दो तीन दिनों में बिठ्ठन और चैहड़कलां के खेतों मेसं फाका (निफ) दिखाई देने पर किसानों ने कृषि विभाग को सूचना दी। जिस पर कृषि विभाग ने टीमें गठित कर यहां दवा का छिड़काव करवाना शुरू कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर रविवार को कृषि मंत्री भी मौके पर पहुंच गए।
कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि 10-12 दिन पहले चैहड़ कलां गावों में टिड्डी दल ने पड़ाव डाला था जिसे तुरंत दवा का छिड़काव कर नष्ट कर दिया गया था। इस दौरान टिड्डियों द्वारा दिए गए अंडों से निकला फाका अब सक्रिय हुआ है, जिसे उड़ने से पूर्व ही नष्ट कर दिया जाएगा।
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फसलों के लिए टिड्डी से ज्यादा घातक हैं उसके शिशु अर्थात फाका
कृषि अधिकारी चंद्रभान श्योराण ने बताया कि टिड्डियों से ज्यादा घातक उनके शिशु अर्थात फाका (निफ) होता है। जो फसलों को नीचे ही नीचे खाता रहता है। जब तक फाका टिड्डी बनकर उड़ने की स्थिति में पहुंचता है तब तक वह फसल को काफी नुकसान पहुंचा देता हैं। प्रजनन के दस से 15 दिनों में फाका सक्रिय हो जाता है और उसके दस दिन बाद ही टिड्डी का रूप ले लेता है। उन्होंने बताया कि फाका (निफ) को नष्ट करने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। जिसका छिड़का खेतों मेें शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बिठ्ठन और चहड़कलां में दो-दो सदस्यों की टीमें बनाई गई हैं।
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