भिवानी। अगर आप जिला नागरिक अस्पताल में एक्स-रे कराना चाहते हैं तो जरा संभलना, क्योंकि एक्स-रे कराने के बाद आपको खुद ही एक्स-रे प्लेट रेडियोलॉजिस्ट तक लेकर जानी पड़ेगी। क्योंकि वहां तैनात कर्मचारी केवल एक्स-रे करने के बाद मरीजों को ही एक्स-रे प्लेट थमा रहे हैं। ये लापरवाही कहें या फिर अस्पताल प्रशासन की ढिलाई, मरीजों पर ये भारी पड़ सकती है, क्योंकि एक एक्स-रे की गलत रिपोर्ट उस व्यक्ति का इलाज भी प्रभावित कर सकती है।
हमारे संवाददाता की पड़ताल में जिला नागरिक अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में ऐसे काफी मरीज अपने हाथों में एक्स-रे प्लेट थामे दिखे। जो पहले तो घंटों तक लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। जब एक्स-रे हुआ तो उन्हीं ही प्लेट थमाकर रेडियोलॉजी कक्ष में ले जाने के लिए बोला गया।
दरअसल, एलएनटी कंपनी ने 2010-11 में भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल आधुनिकीकरण किया था, उस समय दो एक्स-रे मशीन मिली दी गई थी। अस्पताल में 13 साल बाद दो नई एक्स-रे मशीन भी आ चुकी है। जिन्हें सप्ताह भर बाद चालू कर दिया जाएगा। यहां चौबीसों घंटे एक्स-रे की सुविधा भी मुहैया कराई गई है।
एक्स-रे सीआर सिस्टम से जुड़े हैं यानी एक्स-रे होने के बाद रेडियोलॉजिस्ट इसकी रिपोर्ट सीधे संबंधित चिकित्सक के कंप्यूटर पर ही भेजता है, ताकि चिकित्सक एक्स-रे रिपोर्ट देखकर संबंधित मरीज को उचित उपचार दे सके। लेकिन यहां इसके उलट हो रहा है। एक्स-रे कक्ष में एक्स-रे होने के बाद कर्मचारी उसी मरीज के हाथ में एक्स-रे प्लेट थमा देते हैं। जिसे खुद रेडियोलॉजिस्ट के पास ले जाना पड़ता है। इसके बाद ही रेडियोलॉजिस्ट इस प्लेट को अपने सिस्टम में डालकर उस एक्स-रे की रिपोर्ट तैयार करता है। संवाद
शिफ्ट के हिसाब से तैनात हैं एक्स-रे के लिए अस्पताल में कर्मचारी
जिला नागरिक अस्पताल में चौबीसों घंटे एक्स-रे की सुविधा दी गई है, क्योंकि एक्स-रे कक्ष के पास ही आपातकालीन विभाग भी है, जहां इमरजेंसी केस आते ही रहते हैं। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाओं में आने वाले लोगों के एक्स-रे भी होते हैं। ऐसे में यहां शिफ्ट में कर्मचारियों की तैनाती दी गई है। नियम के अनुसार मरीज को एक्स-रे स्लिप कर्मचारी को देने के बाद उसका एक्स-रे करने और उसकी रिपोर्ट तैयार कराने तक की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की है। इस बीच कोई भी मरीज एक्स-रे या फिर एक्स-रे प्लेट को छू भी नहीं सकता, क्योंकि इसमें मरीज की रिपोर्ट प्रभावित होने की संभावना अधिक बनी रहती है। मगर यहां तो हर मरीज को उसका एक्स-रे खुद ही एक्स-रे प्लेट ले जाकर कराना पड़ता है।
ज्यादा मरीज होने से एक्स-रे प्लेट मरीज को दे देते हैं। क्योंकि कर्मचारी एक-एक मरीज की प्लेट को लेकर जाएगा तो समय ज्यादा लग जाएगा। अगर कर्मचारी प्लेटों को एक साथ लेकर जाएगा तो प्लेटें मिक्स हो जाएगी। इससे गलती की संभावना अधिक बनी रहेगी। इसीलिए प्लेटों को मरीज को दे दिया जाता है।
-प्रमोद, इंचार्ज, रेडियोलॉजी विभाग, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
मुझे इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। अगर मरीज को ही एक्स-रे प्लेट थमाई जा रही है तो यह बहुत बड़ी लापरवाही है। अगर ऐसा है तो बहुत ही गड़बड़ चल रही है। इसे मैं अपने स्तर पर चेक करूंगा। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी करेंगे।
-डाॅ. दशरथ राव, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।