शिक्षा विभाग जिन गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपने रिकार्ड में बंद करा चुका है, उन स्कूलों में फिलहाल धड़ल्ले से बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन स्कूलों ने बाकायदा बच्चों को दाखिला दिलाने का प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नजरों से भी यह सब छिपा नहीं हैं, मगर फिर भी शिक्षा अधिकारी मौन है। भिवानी जिला में 370 निजी स्कूलों की पहचान हो चुकी है। जिन्हें शिक्षा विभाग ने कोई अनुमति या मान्यता तक नहीं दी हैं, मगर फिर भी इनमें बच्चों के दाखिले हो रहे हैं।
जिले में करीब 250 गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के अलावा 120 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल चल रहे हैं। गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का खाता तो शिक्षा विभाग बहुत पहले ही बंद कर चुका हैं। शिक्षा विभाग ने भी इन स्कूलों को कोई मान्यता या फिर एक्सटेंशन नहीं मिलने की वजह से बंद करने की डेडलाइन भी 31 मार्च तक दी हुई है। इन स्कूलों के करीब 30 हजार बच्चों का भविष्य भी दांव पर है।
हरियाणा स्कूली शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा नियमावली 2003 व 2009 के अनुसार जिन स्कूलों को अस्थायी मान्यता देते हुए हर साल एक साल की एक्सटेंशन दी जाती रही थी। ऐसा पिछले काफी सालों से किया जाता रहा, लेकिन अब शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए अस्थायी मान्यता प्राप्त करने वाले निजी स्कूलों को कोई एक्सटेंशन नहीं दी। जिन स्कूलों पर शिक्षा विभाग ने सील लगाई थी, वे अब चल रहे हैं। इनमें न केवल बच्चों की नियमित कक्षाएं लग रही हैं, बल्कि इन स्कूलों में नियमानुसार बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कोई इंतजाम भी नहीं है।
दो बार शिक्षा विभाग ने चलाई थी सीलिंग की कार्रवाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जिला स्तर पर गैर मान्यता स्कूलों पर कार्रवाई के लिए दो बार सीलिंग अभियान चलाया। इस दौरान शहर के स्कूलों की पहचान कर उन्हें बंद किए जाने की चेतावनी दी और रिकार्ड में भी शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को स्थायी तौर पर बंद दर्शाया, लेकिन ये स्कूल आज भी धड़ल्ले से न केवल खुले हैं, बल्कि बच्चों के भी दाखिले कर रहे हैं। इन्हें बंद कराने की रिपोर्ट शिक्षा अधिकारी मुख्यालय को भी भेज चुके हैं।
विभाग कर चुका धर्मशाला को कई साल पहले कंडम, अब भी चल रहा निजी स्कूल
शहर के लोहड़ बाजार चौक पर एक ऐसा स्कूल भी है, जो वर्षों पहले बीएंडआर विभाग द्वारा कंडम घोषित की धर्मशाला में चल रहा है। इस भवन पर चेतावनी बोर्ड भी लगा है। जिस पर लिखा है कि यह भवन कभी भी गिर सकता है। बावजूद इसके 150 बच्चे इसमें पढ़ाई कर रहे है। सीलिंग कार्रवाई में इस स्कूल का भी डीईओ द्वारा गठित टीम ने जांच की थी, मगर जांच के बाद भी इस भवन के अंदर पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया।
गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ संगठन द्वारा बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका डाली हुई है, जिसकी अगली सुनवाई 20 मार्च को है। लेकिन सोमवार को फिर से एक शिकायत हाईकोर्ट में दी जाएगी, जिसमें इन स्कूलों को जल्द से जल्द बंद कराने और बच्चों के दाखिलों पर रोक लगवाई जाएगी।
- बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
शिक्षा निदेशालय ने केवल मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में ही बच्चों को दाखिला कराए जाने की सख्त हिदायत दी हुई हैं। गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कोई दाखिला नहीं होगा। अगर कोई दाखिला किया गया है तो वो 31 मार्च से पहले ही विड्राल कराया जाएगा। इस संबंध में विभाग की तरफ से भी ऐसे स्कूलों को सख्त हिदायत जारी की गई हैं।
- अजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी