हरियाणा के भिवानी में आचार्य महाश्रमण सैकड़ों साधु व साध्वियों के साथ मंगलवार को प्रेक्षा विहार पहुंचे। आचार्य का भव्य स्वागत सभी सभी समाजों के लोगों ने किया। किरोड़ीमल पार्क में आयोजित अभिनंदन समारोह में आचार महाश्रमण ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सारे विश्व में शांति रहे। युद्ध तो अंतिम हथियार होना चाहिए।
अपने प्रवचनों से शांति व नैतिकता का संदेश देने वाले राष्ट्र संत ने कहा कि जीवनयापन के लिए धन का अर्जन तो जरूरी है, लेकिन अनैतिकता से कमाया धन किसी काम का नहीं। इंसान को अधर्म का रास्ता अपनाकर धन नहीं कमाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्य या अनुष्ठान में अशुद्ध धन का प्रयोग बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि धन तो इस लोक में काम आता है, लेकिन धर्म परलोक में भी साथ देता है। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी सत्य और लक्ष्मी में से किसी एक को चुनने की बात आए तो आदमी को सत्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां सत्य होता है, लक्ष्मी वहां स्वत: चली आती है। उन्होंने छोटी काशी यानी भिवानी को विद्वतजनों एवं चरित्रवान लोगों का शहर बताया। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को अपने शहर के नाम की प्रतिष्ठा का भी ख्याल रखना चाहिए।
पैदल यात्रा के दौरान सरकुलर रोड पर आचार्य महाश्रमण के दर्शन करते श्रद्धालु। संवाद
आचार्य से भिवानी में ही चातुर्मास करने का आग्रह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त आरएस ढिल्लों ने महाश्रमण के अहिंसा, नैतिकता और नशामुक्ति के अभियान की सराहना की और कहा कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर मानवता का कल्याण हो सकता है। उपायुक्त ने आचार्य महाश्रमण से भिवानी में चातुर्मास करने की भी अपील की। संत निरंकारी मंडल के क्षेत्रीय प्रमुख बलदेवराज नागपाल ने कहा कि उनका तेरापंथ से गहरा नाता है। जोहड़ीवाला हनुमान मंदिर के महंत चरणदास ने भी आचार्य से भिवानी चातुर्मास फरमाने का निवेदन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ समाज की ओर से एक अभिनंदन गीतिका द्वारा किया, जिसमें आचार्य से आगामी वर्षों में चातुर्मास घोषित करने की पुरजोर प्रार्थना की गई।
ईमानदारी, नैतिकता और सदाचार सभी धर्मों का सार
आचार्य की धवल सेना नौरंगाबाद से विहार करके रोहतक रोड स्थित राधास्वामी सत्संग भवन के पास पहुंची, जहां हुजूर महाराज संत कंवर साहब ने उनका स्वागत किया। आचार्य महाश्रमण अल्प समय के लिए राधास्वामी भवन पधारे और संक्षिप्त आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि ईमानदारी, नैतिकता और सदाचार सभी धर्मों का सार है।
रोहतक गेट चौक पर जैन मुनि आश्रम परिवार, आदर्श महिला महाविद्यालय के सामने महाविद्यालय परिवार एवं निरंकारी भवन के आगे निरंकारी संगत ने आचार्य सहित सभी साधु संतों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संयोजन सुरेंद्र जैन एडवोकेट ने किया।
इस अवसर पर शशिरंजन परमार, शिवरतन गुप्ता, बृजलाल सर्राफ, विजय गोठड़ा, संदीप तंवर, रामदेव तायल, महेंद्र जैन, रमेश बंसल, अशोक जैन, नवीन नाहटा, सुनीता नाहटा जैन, विकास जैन, ब्रजेश आचार्य, सुभाष जैन, माणिक चंद नाहटा, नरेश जैन, विनोद जैन, देवराज तोशामिया, मनोज जैन, आनंद जैन, सौरभ जैन उपस्थित थे।