जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घर से रजाई लाना जरूरी है
भिवानी। सर्दी के मौसम में यदि जिला अस्पताल में इलाज करवाना है तो घर से रजाई लाना होगा। क्योंकि, वार्डों में मिलने वाले कंबल बहुत हल्के हैं जो ठंड रोकने को नाकाफी हैं। कई वार्डों की खिड़कियों में शीशा नहीं है जिसकी वजह से अस्पताल में मिले कंबल ओढ़ने वाले ठिठुरते रहते हैं। खिड़कियों में कांच की जगह गत्ते लगाकर सर्दी से बचाव का जुगाड़ किया गया है।
चौधरी बंसीलाल जिला अस्पताल के वार्ड नंबर चार और छह नंबर बी ब्लॅाक में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। जिसकी वजह से मरीजों को सर्द और ठंडी हवाएं और बीमार कर रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने खिड़कियों पर शीशा लगवाना जरूरी नहीं समझा, बल्कि सर्दी से बचाव के लिए गत्तों से जुगाड़ किया गया है। मरीजों को अस्पताल की ओर से मुहैया कराए जाने वाले दो कंबल सर्दी रोकने के लिए काफी नहीं हैं। ठंड से बचने के लिए दो कंबल ओढ़ने पड़ते हैं या अपने घर से बिस्तर व रजाई को लाना पड़ता है।
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एक कंबल में लगती है ठंड, घर से ला रहे हैं रजाई
रात के समय ठंड अधिक होती है। जिसके कारण कंपकपाहट होनी शुरू हो जाती है। अस्पताल की ओर से कंबल तो दिए गए हैं, लेकिन एक कंबल से ठंड नहीं रुकती, जिसके कारण अपने घर से बिस्तर का बंदोबस्त करके ही लाए हैं।
कृष्ण कुमार
अस्पताल की खिड़कियों पर शीशे की जगह गत्ते लगाए गए हैं, जो सर्द हवाएं रोकने के लिए नाकाफी है। रात के समय ठंडी हवा आती रहती है, जिससे और े परेशान होना पड़ता है।
कर्मवीर
अस्पताल में कंबल पतले हैं। एक मरीज को एक कंबल की बजाय दो कंबलों जरूरत पड़ रही है। अधिकतम मरीज अपने घर से ही रजाई लेकर आए हुए हैं।
रामचंद्र
अभी तो छुट्टी है, जब ऑफिस खुलेगा, तब शौचालय, खिड़की और दरवाजों की मरम्मत करवा दी जाएगी। मरीजों की सुविधा का ख्याल रखना विभाग की प्राथमिकता है।
डीएन बागड़ी, पीएमओ, जिला अस्पताल