भिवानी। जूई फीडर नहर में वीरवार को 400 क्यूसेक पानी पहुंचने से शहर के सूखे पड़े जलघरों को भरना शुरू कर दिया गया है। शहरवासियों को पानी की राशनिंग (एक दिन छोड़कर आपूर्ति) से पूरी तरह निजात पाने में अभी 3 से 4 दिन का समय और लग सकता है।
सिंचाई विभाग के नए शेड्यूल के अनुसार नहरों में अब 18 मई तक लगातार पानी उपलब्ध रहेगा। वर्तमान में केवल जूई नहर में ही पानी छोड़ा गया है जबकि मिताथल फीडर और सुंदर सब ब्रांच फिलहाल बंद हैं। विभाग ने मोहला हेड से सुबह 600 क्यूसेक पानी प्राप्त किया जिसमें से जूई नहर के हिस्से में 426 क्यूसेक पानी पहुंचा है। शुरुआत में नहर में मिट्टी की मात्रा अधिक होने के कारण, पानी साफ होने के बाद ही टैंकों में भरने का काम तेज किया जाएगा।
1550 क्यूसेक पानी की मांग पर कटौती बरकरार
बढ़ती गर्मी और पानी की खपत को देखते हुए विभाग ने मुख्यालय से 11 से 18 मई के बीच कुल 1550 क्यूसेक पानी की मांग की है। सुंदर सब ब्रांच के लिए 800 क्यूसेक, मिताथल फीडर के लिए 250 क्यूसेक, जूई फीडर के लिए 500 क्यूसेक पानी की मांग है। पूर्व में यह मांग 1700 क्यूसेक तक की गई थी लेकिन नहरी पानी की किल्लत के चलते इसमें कटौती कर दी गई है। 11 मई तक जूई नहर में केवल 350 से 400 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो पाएगा।
पंपिंग स्टेशन की कम क्षमता बनी चुनौती
नहर में पानी आने के बावजूद तकनीकी समस्या बरकरार है। जल विभाग के पंपिंग स्टेशनों की क्षमता कम होने के कारण नहरी पानी का पूरा लाभ नहीं मिल पाता और टैंक अक्सर खाली रह जाते हैं। इस बार भी कम क्षमता के चलते टैंकों को पूरी तरह भरने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सिंचाई विभाग का ध्यान शहरी जलघरों के टैंकों को प्राथमिकता के आधार पर भरने पर केंद्रित है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का निरीक्षण
डीसी साहिल गुप्ता के निर्देश पर विभाग के अधिकारी जूई फीडर पर पहुंचे और पंपिंग स्टेशन की स्थिति का जायजा लिया। अधीक्षक अभियंता सुनील रंगा और कार्यकारी अभियंता कपिल देव ने नहरों में पानी आने की स्थिति देखी और सभी पंप व मोटरें चालू कर दीं। अधिकारियों ने बताया कि अब नागरिकों को पेयजल की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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गर्मी में पानी की खपत बढ़ जाती है। इससे पेयजल आपूर्ति में राशनिंग भी करनी पड़ती है। नागरिकों से अपील है कि वे पानी की बचत करें। पेयजल को किसी भी तरह बर्बाद न करें। वाहनों को पेयजल से न धोएं और पशुओं को भी पेयजल से न नहलाएं। इसी प्रकार से पानी की टोंटी को खुला न छोड़ें। पेयजल को गलियों में व्यर्थ न जाने दें। - साहिल गुप्ता, उपायुक्त, भिवानी।