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छापेमारी के बाद सामने आई खामियां

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। हैफेड गोदाम से दादरी के आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई हो रहे अनाज में मिली कमी के बाद अब विभागीय स्तर पर खामियां उजागर होने लगी है। सीएम फ्लाइंग ने शुक्रवार को हैफेड गोदाम की जांच की और कर्मचारियों से पूछताछ की तो सामने आया कि डिलीवरी के समय कोई वजन ही नहीं किया जाता। ना ही हैफेड का कोई कर्मचारी साथ जाता है। वहां एक तरफ रखे करीब 20 कट्टों में अनाज भी कम मिला। जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे है।
हैफेड गोदाम से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सप्लाई हुए अनाज के कट्टों में पांच से 10 किलो तक अनाज का कम मिलना साफ दिखाता है कि बड़े लेवल पर घपला चल रहा है। हैफेड कर्मचारी ठेकेदार पर आरोप लगा रहे है तो ठेकेदार ने हैफेड कर्मचारियों पर आरोप लगाए है। यह तो जांच में ही शामिल होगा कि किस स्तर पर घपला हो रहा है। फिलहाल ठेकेदार और उसके चार कारिंदों पर केस दर्ज हो चुका है।
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केस दर्ज किए जाने के बाद सीएम फ्लाइंग, नायब तहसीलदार नरेश कुमार, डीएम हैफेड श्रीकृष्ण नरवाल ने शुक्रवार सुबह तोशाम बाईपास ऑटो मार्केट के नजदीक हैफेड गोदाम का निरीक्षण किया तो अनेक खामियां उजागर हुई। वहां एक साइड में रखे चावल और गेहूं के कट्टों में पांच से 10 किलो तक अनाज कम मिला वहीं सबसे मुख्य खामी नजर आई कि कि सप्लाई किए जाने वाले अनाज का वजन ही नहीं करवाया जाता। सीधे गोदाम से कट्टे गाड़ी में भरवाए जाते है। नियम तो यह भी है कि विभाग का एक कर्मचारी गाड़ी के साथ जाकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक अनाज पहुंचाएगा ताकि रास्ते में किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी ना हो। मगर यहां सभी नियम ताक पर है। जिस कारण कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे है।
ये भी लगे आरोप
ढुलाई ठेकेदार पवन ने जिला के अंदर आंगनबाड़ी केंद्रों पर माल सप्लाई के लिए 8 रुपये 80 पैसे में टेंडर भरा था। आरोप है कि इतने कम रुपये में टेंडर से जब भरपाई नहीं हुई तो उसने माल चोरी कर इसकी क्षतिपूर्ति शुरू कर दी। इसी कारण आंगनबाड़ी केंद्रों तक कम माल पहुंचाया जा रहा था। ठेकेदार पवन ने आरोपों को नकार दिया।
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मैने अभी ज्वाइन किए तीन दिन ही हुए है। यहां डिलीवरी से पहले वजन करने का प्रावधान नहीं था। आज डीएम से बातचीत कर इसका प्रावधान किया गया है। आगे से जो भी अनाज सप्लाई किया जाएगा, उससे पहले कट्टों का वजन किया जाएगा। गाड़ी के साथ एक विभागीय कर्मचारी जाने का नियम तो है मगर कर्मचारियों की कमी के चलते यह संभव नहीं हो रहा।
-जानी कुमार, फील्ड इंस्पेक्टर, हैफेड

हम तो गाड़ी के ठेकेदार है और बेवजह फंसाया जा रहा है। आज तक हैफेड का कोई कर्मचारी उनके साथ माल लेकर नहीं गया। जबकि जिम्मेवारी उनकी ही है।
-पवन कुमार, ठेकेदार
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