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किसान आंदोलन: राजस्थान सरकार के खिलाफ पारित किया निंदा प्रस्ताव

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किसान आंदोलन: राजस्थान सरकार के खिलाफ पारित किया निंदा प्रस्ताव
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बहल। राजस्थान में आंदोलन कर रहे किसानों पर राजस्थान सरकार द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ यहां तहसील परिसर में अखिल भारतीय किसान ने एक दिवसीय धरना दिया।
धरने में किसानों ने घटना की कड़ी आलोचना की तथा निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में कहा गया कि राजस्थान सरकार लोकतंत्र का सम्मान करते हुए किसानों की आंदोलन को कुचलने के प्रयास की जगह उनकी मांगों को पूरा करें।
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तहसील परिसर में एकत्रित किसानों ने निर्णय लिया कि जरूरत पड़ी तो बहल खंड से किसानों का जत्था राजस्थान के आंदोलन में भाग लेने जाएगा। किसानों ने धरने के दौरान विभिन्न मांगों को उठाया तथा प्रदेश सरकार से उनको अविलंब पूरा करने की मांग की। किसानों ने कहा कि ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों की एवज में सरकार विशेष गिरदावरी कर किसानों को मुआवजा दे। किसानों ने नायब तहसीलदार जगदीश चंद्र को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया। ज्ञापन में गेहूं का समर्थन मूल्य 2450 रुपये तथा सरसों का 5500 रुपये निर्धारित कर मार्च के आखिरी सप्ताह तक सरकारी खरीद शुरू करने, कर्जा मुक्ति बोर्ड का गठन कर किसानों के कर्जे माफ करने की मांग की।
इसके अलावा किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, नहरों में पर्याप्त पानी दिए जाने, आवारा पशुओं से फसलों को बचाने, ढ़ाणियों में बिजली व्यवस्था सुचारू करने, बहल के सभी रूटों पर पर्याप्त बस चलाए जाने की मांग उठाई। किसानों ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सरलीकरण करने तथा इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने की पुरजोर बात रखी।
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इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रदेश सचिव दयानंद पूनिया, कैप्टन ईश्वर सिंह, डॉ. बलबीर ठाकन, सीटू नेता हनीफ खान बहल, रामकर्ण साहब, मीरसिंह सांगवान, हवासिंह जांगड़ा, महीपाल, मांगे, कृष्ण, प्रताप मूंड, शेरसिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। धरने की अध्यक्षता खंड प्रधान भगवान सिंह लाखलाण ने की, जबकि संचालन सुशील नागल ने किया।
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