अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। स्वास्थ्य विभाग भले ही सामान्य अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करें मगर जमीनी हकीकत यह है कि यहां उन्हें अनेक परेशानियों से जूझना पड़ता है। चाहे ओपीडी में पर्ची (ट्रीटमेंट स्लिप) के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता हो या फिर चिकित्सक से इलाज और दवा लेने के लिए लंबी कतार में जद्दोजेहद। इन सबके बावजूद मरीज को पूरा इलाज नहीं मिल सके तो मरीज की हालत क्या होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसा ही अस्पताल में इन दिनों हो रहा है। दरअसल ओपीडी में पर्ची लाइन, चिकित्सक से इलाज के लिए इंतजार, दवा खिड़की पर लंबे इंतजार के बाद भी मरीजों को आधी-अधूरी दवाइयां मिल रही हैं। सभी दवाइयां नहीं मिलने के कारण पूरा इलाज संभव नहीं। चिकित्सक की ओर से ट्रीटमेंट स्लिम में पांच से छह तरह की दवाइयां लिखी जाती हैं मगर अस्पताल से मिलती हैं महज दो या ज्यादा से ज्यादा तीन प्रकार की। अन्य दवाइयां मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर हैं।
सामान्य अस्पताल में हर रोज करीब 1500 मरीज इलाज के लिए आते हैं। सुबह छह बजे ही मरीज इलाज के लिए अस्पताल में पहुंचना शुरू हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि मरीजों को सभी दवाइयां अंदर से ही मिले। मगर मरीजों को सभी दवाइयां तो दूर आधी भी अच्छे से नहीं मिलती। सभी चिकित्सकों को पहले ही हिदायत है कि अस्पताल की लिस्ट में शामिल दवाइयां ही लिखें। ऐसे में चिकित्सक सिर्फ अस्पताल की लिस्ट की ही दवाइयां लिख रहे हैं और मरीजों को वो भी नहीं मिल रही।
आयरन, कैल्शियम, बच्चों के बुखार की दवा भी खत्म
सामान्य अस्पताल में फिलहाल अनेक तरह की दवाइयां खत्म हैं जिससे मरीजों को उनके वैकल्पिक दवाइयां जो संबंधित बीमरी में पूरी तरह कारगर नहीं हैं दी जा रही हैं। सूखी और बलगम वाली खांसी में एक ही तरह की दवाइयां दी जा रही हैं। इसके आयरन, कैल्शियम जैसी जरूरी दवाइयां भी खत्म हैं। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक सबसे पहले आयरन, कैल्शियम की गोलियों की ही सलाह देते हैं। सबसे ज्यादा ओपीडी भी महिला रोग विशेषज्ञ की ही रहती है। इनके अलावा छोटे बच्चों को बुखार के समय दिया जाने वाला सिरप भी खत्म है। कुत्तों के काटने के केस भी पहले से बढ़े हैं, मगर एंटी रैबिज के इंजेक्शन खत्म हैं। ओपीडी ही नहीं इमरजेंसी के भी अनेक जरूरी इंजेक्शन और दवाइयां खत्म है।
एक माह पहले सीएमओ ने अस्पताल से ही दवा उपलब्ध कराने के दिए थे निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने करीब एक महीना पहले सामान्य अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण किया था। नीकू वार्ड और महिला विभाग में मरीजों के बाद बाहर से खरीदी हुई दवाइयां मिली थी। मरीजों से बातचीत के बाद सिविल सर्जन ने चिकित्सकों की क्लास लगाई थी और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही दवाइयां खरीदने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वहां के चिकित्सकों ने करीब 80 प्रकार की दवाइयां व अन्य जरूरतों की लिस्ट बनवाकर खरीद के लिए भिजवाई। महीना बीतने के बाद भी अब तक दवाइयों का इंतजार ही हो रहा है।
समस्या मरीजों की जुबानी
डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी, अस्पताल से दो ही मिली
सांस की बीमारी है। यहां चिकित्सक से दिखाया तो उन्होंने दवा का एक पंप लिखा है। इसके अलावा पांच दवाइयां लिखी, मगर अंदर से दो ही दवाइयां मिली है। बाकी बाहर से खरीदनी होंगी। उसकी आर्थिक हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है।
लीलूराम, भिवानी
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आंखों की आई डॉप भी बाहर से खरीदी
आंखों को चेक कराया तो चिकित्सक ने एलर्जी बताई। चिकित्सक ने एक आई ड्रॉप लिखा है। मगर अंदर से नहीं मिला। सिर्फ दो तरह की गोलियां मिली। बाकी अब बाहर से खरीदनी होंगी।
मुस्कान पूनिया, हालुवास गेट
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अस्पताल से नहीं मिली दवाइयां
छह महीने पहले घुटना बदलवाया था। अब बहुत ज्यादा कमजोरी आ गई। चिकित्सक को दिखाया तो कैल्शियम, आयरन व कुछ अन्य दवाइयां लिखी हैं मगर अस्पताल के अंदर से दवाइया नहीं मिली।
मनोहरलाल, कृष्णा कॉलोनी
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छह दवाइयों में से तीन बाहर से खरीदी
दांत में दर्द होने के कारण यहां चिकित्सक से इलाज के लिए पहुंची। चिकित्सक ने जांच के बाद पर्ची पर छह तरह की दवाइयां लिखी। अस्पताल की मेडिकल विंडो से तीन ही दवाइयां मिली। बाकी बाहर से खरीदने के लिए बोला है।
अंजू, गांव बापोड़ा
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वर्जन::::
सप्लाई में दवाइयां नहीं आने के कारण कई बार समस्या बन जाती है। ऐसी स्थिति में हम स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाइयों की खरीद करेंगे ताकि मरीजों को दी जा सके। जल्द ही दवाइयां खरीदी जाएंगी।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन