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मंच पर बिताए 22 मिनट, सात मिनट दिया भाषण, रोड पर बिताए 93 मिनट

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भिवानी। दो घंटे देरी से भिवानी पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो कार्यक्रमों में मंच पर महज 22 मिनट बिताए और सात मिनट भाषण दिया। मगर रोड शो पर पूरा दिया ध्यान दिया।
मुख्यमंत्री को दोपहर बाद तीन बजे हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में आयोजित अलंकरण समारोह में पहुंचना था मगर वे भिवानी में ही चार बजे पहुंचे। यहां से सीधे विकास नगर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे और वहां से 04:47 पर बोर्ड में पहुंचे। बच्चों को पंडाल से अलग सम्मानित किया और मंच पर पहुंचते ही माइक पकड़ कर कहा कि पहले शिक्षा मंत्री बोलेंगे और फिर मैं। शिक्षा मंत्री ने भी तीन से चार मिनट में अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने भी भी यहां बमुश्किल चार मिनट ही माइक थामा और बोर्ड की कार्यप्रणाली की सराहना की और तीन घोषणाएं की। 05:07 तक मुख्यमंत्री कार्यक्रम से निकल चुके थे। यहां से रेस्ट हाउस पहुंचे और 05:20 पर मुबारक गार्डन में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे। यहां तीन दिन में जिलाध्यक्ष नंदराम धानिया और विधायक घनश्याम सर्राफ ने अपनी बात रखते हुए स्वागत किया और तीन मिनट में मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं रोड शो और सरकार की नीतियों के बारे में बताते हुए अभी से चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। 05:26 पर यहां से निकले। रोड शो शाम 05:29 पर शुरू हुआ और 07:02 बजे तक चक चला। यानी 93 मिनट सड़क पर बिताए।
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सीएम से नहीं मिलने दिया तो पुलिस कर्मियों को खूब दी गाली
- चुपचाप सुनते रहे पुलिसकर्मी
- एक व्यक्ति, एक महिला अपने बेटी के साथ पहुंचे थे बाजार, मारपीट का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सीएम से नहीं मिलने दिया तो एक परिवार ने भरे बाजार पुलिस को खूब खरी-खरी सुनाई। दुकानदार भी परिवार के साथ खड़े नजर आए और पुलिसकर्मी सिर्फ इतना कहते नजर आए कि उन्हें गाली मत दो। महिला और व्यक्ति ने पुलिस पर मारपीट का भी आरोप लगाया। गाली-गलौज करते हुए महिला अपने और परिवार के बारे में कुछ भी बताने को तैयार नहीं थी। करीब एक घंटे तक बर्तन बाजार में खूब हंगामा चला और पुलिस कर्मी, महिला थाना पुलिस मूकदर्शक बने नजर आए। बस परिवार के सदस्यों ने इतना बताया कि पुलिस कुछ लोगों के साथ मिलीभगत करके नाबालिग बेटी पर झूठा केस दर्ज कर परेशान कर रही है। बाद में पुलिसकर्मी वहां से चले गए और उक्त परिवार के सदस्य भी वहां से चले गए।

सीएम पहुंचने से पहले डीईईओ, डीपी और पीटीआई की हुई नोक-झोंक, जमकर हुआ हंगामा
- शिक्षा बोर्ड में शिक्षामंत्री से नहीं मिलने देने पर हुआ विवाद, आयोजकों और पुलिस की फूली सांसे
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। शिक्षा बोर्ड अलंकरण समारोह में सीएम मनोहर लाल के पहुंचने से चंद मिनट पहले ही शिक्षा विभाग के डीईईओ और डीपी व पीटीआई के बीच हुई नोक-झोंक के बाद जमकर हंगामा हुआ। शिक्षा बोर्ड में पहुंचे शिक्षा मंत्री से डीपी और पीटीआई को डीईईओ द्वारा नहीं मिलने देने पर हुए विवाद के बाद समारोह के आयोजकों और पुलिस प्रशासन की सांसे फूल गई। हंगामे के चलते मौके पर मौजूद डीएसपी को कमान संभालनी पड़ी और शिक्षा विभाग के जिला अधिकारी, डीपी व पीटीआई को शांत किया।
हरियाणा शारीरिक शिक्षा अध्यापक संघ के जिला प्रधान राजपाल तंवर को डीईईओ सदानंद वत्स ने चार अक्तूबर को सस्पेंड कर दिया था। मामले की जांच हुई तो राजपाल निर्दोष पाए गए थे। संघ के बार-बार दबाव के चलते डीईईओ द्वार सोमवार को राजपाल तंवर को बहाल तो कर दिया, लेकिन उनकी पोस्टिंग भिवानी से 70 किलोमीटर दूर बीजाणा बास गांव में कर दी। संघ के वरिष्ठ उपप्रधान विरेंद्र घणघस ने बताया कि राजपाल ढाणी चांग में ड्यूटी थी। उनकी पोस्टिंग जान-बूझकर दूर की गई। उन्होंने बताया कि सोमवार को शिक्षा बोर्ड में अलंकरण समारोह में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा से मिलने के लिए शारीरिक अध्यापक सोमदत्त शर्मा, राजेश ढांडा, विनोद बॉक्सर, बलवान श्योराण, रामचंद्र, भूपेंद्र, पवन शिक्षा बोर्ड में गए थे।
उन्होंने बताया कि वहां पर मौजूद डीईईओ सदानंद वत्स ने कहा कि मैं तुम्हारा बॉस हूं, मेरा अधिकार है किसको कहा पर लगाना है। तुम्हें शिक्षा मंत्री से मिलने की कोई जरूरत नहीं है। जिसके बाद डीईईओ और डीपी व पीटीआई के बीच नोक-झोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते यह नोक-झोंक हाथापाई में बदल गई। वहां पर मौजूद डीएसपी संजय बिश्नोई, कुलभूषण ने सभी को बड़ी मुश्किल से शांत किया और वहां पर बैठाया। हंगामे के चलते एक बार आयोजकों और पुलिस की हाथ-पांव फूल गए थे। मामला शांत होने के बाद ही सभी ने राहत की सांस ली।
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डीसी से मीटिंग के बाद होगा गेम्स के बहिष्कार का फैसला
हरियाणा शारीरिक शिक्षा अध्यापक संघ के वरिष्ठ उप प्रधान विरेंद्र घणघस ने बताया कि सुबह आठ बजे डीसी ने मीटिंग के लिए बुलाया है। मीटिंग में अगर उनके पक्ष में फैसला नहीं हुआ तो उसके बाद ही भी स्टेडियम में चल रहे 53वें राज्य स्तरीय गेम्स के बहिष्कार को फैसला लिया जाएगा।
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