श्रीराम ने किया बालि का वध
बहल। कृष्ण वाटिका में चल रही रामलीला मंचन के सातवें दिन श्रीराम द्वारा बालि वध का मंचन किया गया। वन में जब श्रीराम की सुग्रीव से मित्रता होती है तो वह अपने भाई द्वारा दी गई प्रताड़ना को व्यक्त करते हैं। इस पर श्री राम क्रोधित होकर बालि वध की ठान लेते हैं। लेकिन, सुग्रीव श्रीराम को बताता है कि बालि को युद्ध के समय सामने वाले की आधी शक्ति मिलने का वरदान प्राप्त है। इसलिए, अगर आप तक्षक ऋषि के बताए अनुसार, सात ताड़ों के वृक्ष को काट देते हो तभी बालि को मार पाओगे। इसके बाद श्रीराम सुग्रीव की शंका दूर करने के लिए सात ताड़ों के वृक्ष को एक तीर से ही काट डालते है। इस पर जब सुग्रीव बालि को ललकारता है तथा युद्ध के लिए चुनौती देता है। राम दो कारणों से बालि को नहीं मार पाते हैं। इसमें एक तो वे चाहते हैं कि दोनों भाई फिर से एक हो जाए और दूसरी वजह होती है कि वो एक जैसी शक्ल होने के कारण दोनों भाइयों में भेद नहीं कर पाते हैं। दूसरे दिन श्रीराम बालि का वध कर देते हैं। इसके बाद सुग्रीव अपनी वानर सेना को चारों दिशाओं में सीता की खोज के लिए भेज देते हैं।
कथावाचक दीपसंद चौधरी ने हर एक श्लोक का अर्थ समझाते हुए लोगों से उसे जीवन में उतारने की नसीहत दी। बालि बने महावीर शर्मा, सुग्रीव बने अशोक साबू के अलावा घनश्याम भाया, शिवकुमार, मनोज, बबलू, रवि जावला, सुशील शर्मा डिशवाला, विकास चोटिया, जगदीश मेचू ने अपने-अपने किरदार को पूरा किया।