विश्व भर में सबसे बड़े सिर वाले बच्चों में शुमार रह चुकी बेबी रूना इलाज की अगली प्रक्रिया के लिए पूरी तरह से फिट है। चिकित्सकों ने अगले सप्ताह से इलाज की आगे की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
त्रिपुरा निवासी रूना को 16 अप्रैल, 2013 को इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल में दाखिल कराया गया था। रूना का सिर अन्य बच्चों की तुलना में दोगुने से भी बड़ा था। इसे हाइड्रोसिफेलसर कहा जाता है। इसमें सिर के भीतर बनने वाला तरल अवशोषित नहीं हो पाता, जिससे सिर का आकार बढ़ता जाता है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. संदीप वैश्य ने बताया कि 11 जुलाई तक चले इलाज के दौरान रूना के सिर से तरल पदार्थ निकालकर उसकी खोपड़ी की हड्डियों की दोबारा से संरचना की गई थी। इसके बाद 31 अगस्त को उसे छुट्टी दे दी गई थी।
दो दिन पहले रूना इलाज की अगली प्रक्रिया शुरू करने के लिए वापस लौट आई है। तमाम जांच के बाद यह पाया गया है कि रूना इलाज की अगली प्रक्रिया के लिए पूरी तरह से फिट है।
उन्होंने कहा कि इलाज की अगली प्रक्रिया में भी पहले की प्रक्रियाओं को दोहराकर खोपड़ी की संरचना की जाएगी। रूना के पीडियाट्रीशियन की अंतिम सलाह बाकी है। सलाह मिलते ही अगले सप्ताह से आगे का इलाज शुरू कर दिया जाएगा।