दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम नारायणगढ़ में प्रवचन करती हुई साध्वी: स्वयं
- दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नारायणगढ़ आश्रम में आयोजित हुआ सत्संग
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम नारायणगढ़ में रविवार को सत्संग हुआ। इसमें आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रेनू भारती ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सावन माह भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और फलदायी समय माना जाता है। इस पावन मास में विधि-विधान से की गई भक्ति से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष से जब संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान शिव ने समस्त जीवों की रक्षा के लिए उस विष का पान कर उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था। इसी कारण वह नीलकंठ कहलाए। इसी दिव्य घटना की स्मृति में सावन माह में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप का विशेष विधान है।
बेलपत्र और गंगाजल से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ
सत्संग के दौरान साध्वी ने बताया कि सावन में प्रतिदिन शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, धतूरा, बेलपत्र, भांग, आक के पुष्प और सफेद चंदन अर्पित करने से भगवान आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होते हैं। सच्चे भाव और श्रद्धा के साथ किया गया पूजन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करता है तथा जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है। बताया कि संस्थान के पंजाब स्थित नूरमहल के मुख्य आश्रम में 29 जुलाई को देव-दुर्लभ श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे।