अंबाला सिटी। रामबाग ग्राउंड में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या कथा व्यास भागवत भास्कर अदिति भारती ने महिषासुर वध गाथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मां के अवतरण की कथाएं अपने भीतर जीवन परिवर्तनीय व समाज को आंदोलित करने वाले विलक्षण रहस्यों को समेटे हैं। ब्रह्मज्ञान से जब नारी अपने जगदंबा स्वरूप को जानेगी। वह तब ही समाज में अग्रणीय भूमिका निभा सकेगी।
साध्वी ने बताया कि महिषासुर एक पौराणिक पात्र नहीं, अपितु आज समाज में बढ़ती हिंसा, दुराचार, देह व्यापार, बढ़ती अश्लीलता और पथभ्रष्ट होते युवाओं में काम वासना से भरा मन है। मां का महिष मर्दिनी स्वरूप इन सब महिषासुरों के लिए चुनौती है। उन्होंने बताया कि जब-जब काम से पीड़ित मनुष्य नारी का तिरस्कार करता है, उसे वस्तु के रूप में देखता है, तब-तब समाज असंतुलित हो जाता है। बढ़ते महिला उत्पीड़न के मामलों की ओर इंगित करते हुए साध्वी ने कहा कि आशुतोष महाराज का कथन है की यदि समाज को संतुलित करना है, तो आज नारी को अपने वास्तविक शक्ति स्वरूप के प्रति जागृत होना होगा। साथ ही समाज को भी उसकी ओजस्विता को समझना होगा। कथा का समापन देवी मां की पावन आरती से हुआ।