अंबाला सिटी। इस बार प्रदेश में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। पिछले पांच वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब तापमान गेहूं के अनुकूल रहा है। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए दिन और रात्रि का तापमान काफी महत्वपूर्ण है।
दिन के समय तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए तो रात्रि तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास हो। 31 मार्च तक यह तापमान बिल्कुल ऐसा ही रहा। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ गेहूं वैज्ञानिक डॉ ओपी बिश्नोई बताते हैं कि तापमान बढ़ने से गेहूं को गर्मी से जुड़ा तनाव हो जाता है।
इस तनाव का असर गेहूं की पैदावार पर सीधे तौर पर पड़ता है। मगर इस बार तापमान बढ़ता भी तो बीच में दो से तीन पश्चिमी विक्षोभ आ गए जिसने तापमान को नियंत्रित रखने का काम किया। इसके साथ ही तेज हवाएं भी नहीं चलीं जिससे कि फसल बिछे।यही कारण अब प्रदेश में गेहूं की बंपर पैदावार की ओर इशारा कर रहे हैं। इस बार अंबाला में 91 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल लगाई है।
पीले रतवा से परेशान रहे किसान
जीटी बेल्ट के जिलों में अक्सर किसान पारंपरिक रूप से गेहूं की 2967 किस्म को बोते हैं। अंबाला में भी अधिकांश किसानों ने इसी किस्म बुवाई की है। वैज्ञानिक डॉ ओपी बिश्नोई बताते हैं कि इस किस्म में पीले रतवा बीमारी की काफी शिकायतें आ रही हैं। इस कारण से किसानों काे रोग रहित और अधिक पैदावार देने वाली किस्म की ओर बढ़ना होगा। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय इस किस्म को बोने की सलाह भी किसानों को नहीं दे रहा है। किसान डब्ल्यूएच 1270, डीबीडब्ल्यू 327, डीबीडब्ल्यू 303, डब्ल्यूएच 1105, पीबीडब्ल्यू 826 व 827 किस्म का प्रयोग कर सकते हैं। यह किस्म रोग रहित और अधिक पैदावार देती हैं। बहुत से किसानों ने इन किस्मों को इस बार बोया भी है।
पांच वर्षों में पहले घटी फिर बढ़ी पैदावार
अंबाला में गेहूं की पिछले पांच साल की स्थिति को देखें तो वर्ष 2020 में 94 हजार हेक्टेयर पर गेहूं बोया जाता था। तब 5061 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर पैदावार होती थी। इसे बाद गेहूं का रकबा अचानक से कम हो गया। इसके साथ ही पैदावार में भी गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2021 में पिछले वर्ष की तुलना में एक हजार किलोग्राम प्रति हैक्टेयर पैदावार घट गई। अगले वर्ष कृषि विभाग और किसानों ने मिलकर रकबा और पैदावार में हल्का सुधार किया। तब 88860 हैक्टेयर में गेहूं को बोया गया, जिसमें 4638 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर पैदावार मिली। इसके बाद वर्ष 2023 में फिर से गेहूं का रकबा कम हो गया। जबकि पैदावार में 2000 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर का इजाफा हुआ। तब 6707 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर पैदावार हुई।
इसके बाद पिछले वर्ष गेहूं का रकबा बीते पांच सालों में पहली बार एक लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया। ऐसे में पैदावार बढ़ी। पिछले पांच वर्षों में रकबा और पैदावार में जो कम बढ़ हुआ है उसका कारण दूसरी फसलें भी हैं। पिछले साल सरसों के रेट अच्छे रहे थे तो इस बार गेहूं का रकबा कम रहा सरसों का बढ़ गया।
अंबाला में पिछले पांच वर्षों में गेहूं का रकबा व पैदावार की स्थिति
वर्ष- रकबा (हैक्टेयर)- पैदावार (टन)
2020- 94000- 475000
2021- 88000- 360000
2022- 88860- 412000
2023- 82000- 550000
2024- 100000- 600000
वर्जन
इस बार तापमान अनुकूल रहा है इस कारण से गेहूं में बंपर पैदावार होने की संभावना है। कटाई का समय भी शुरू हा गया है।
-जसविंदर सैनी, जिला उप कृषि निदेशक