अंबाला। भगवान शिव की अराधना और उनके जीवन पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। यह प्रस्तुति अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के बच्चों की ओर से दी गई, वहीं पंजाब की शादी पर आधारित बोलियों और नृत्य ने दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया।
इस दौरान पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। देश के अलग-अलग राज्यों पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति ने समा बांध दिया। उत्सव के दूसरे दिन जहां दिल्ली के बच्चों ने नृत्य किया तो वहीं पंजाब के बच्चों ने भी लोक नृत्य और भरतनाट्यम की मुद्राओं को दर्शाया। कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला की ओर से आयोजित संस्कृति 2024 उत्सव शनिवार शाम को समापन हो गया। इस दौरान विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उड़ीसा के सुप्रसिद्ध नृत्य उड़ीया का मंचन दिल्ली स्थित कैंटोनमेंट बोर्ड के बच्चों ने किया। बेहद ही आकर्षक अंदाज में बच्चों ने नृत्य किया और भाव-भंगमिओं द्वारा अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस नृत्य के माध्यम से उड़ीसा की संस्कृति और कला की झलक को बच्चों ने प्रदर्शित किया।
गोधर नृत्य की प्रस्तुति : जालंधर कैंट स्थित बोर्ड स्कूल की छात्रा अदिति ने महाराष्ट्र में पूजी जाने वाली गोधर माता की पूजा से जुड़ा वृतांत प्रदर्शित किया। इसे जोगवा नृत्य भी कहा जाता है जो माता की जीवन से जुड़ी जानकारी को प्रदर्शित करता है कि किस प्रकार उन्हें सुरों का नरसंहार किया।
भरतनाट्यम का मंचन : फिरोजपुर कैंट बोर्ड स्कूल की दो छात्राओं जिया और सैलिना ने मारवाड़ी नृत्य और भरतनाट्यम का मंचन किया। आकर्षक साज-सज्जा में दोनों छात्राओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसमें गुस्से, प्रेमभाव व आलिंगन की मुद्रा को दर्शाया गया, जिसे प्रत्येक दर्शक ने सराहा।
देशभक्ति के गीत गाए : जालंधर कैंट बोर्ड के बच्चों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत गाए। उन्होंने समूह में धरती मां पर आधारित गीत गाकर तालियां बटौरी, वहीं एकल गीत प्रतियोगिता में जोन माइकल ने पंजाबी गीत सुनाकर दर्शकों को स्तब्ध कर दिया।
अंबाला छावनी की मूढ़ा मंडी स्थित गंदगी से अटा नाला। संवाद
अंबाला छावनी की मूढ़ा मंडी स्थित गंदगी से अटा नाला। संवाद
अंबाला छावनी की मूढ़ा मंडी स्थित गंदगी से अटा नाला। संवाद