अंबाला सिटी। जिले के राजकीय स्कूल और काॅलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। राजकीय स्कूलों में जेबीटी अध्यापकों की कमी है तो कॉलेजों में भी प्रोफेसर की काफी समय से भर्ती नहीं हुई है। इस वजह से स्कूल व कॉलेजों में पद रिक्त पड़े हैं। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। स्कूलों में चौकीदार व सफाई कर्मचारी भी नहीं है। इस वजह से शिक्षक खुद ही स्कूलों की सफाई व्यवस्था देख रहे हैं। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाना जरूरी है।
सितंबर 2016 के बाद जेबीटी की ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं हो पाई। इस वजह से कई स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात के अनुसार ज्यादा हैं तो कहीं कम है। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां शिक्षक नहीं है। दूसरे स्कूलों से यहां शिक्षकों को अस्थाई रूप से लगाया गया है। शिक्षकों की नियमित भर्ती की जाए और ऑनलाइन तबादला पॉलिसी को लागू किया जाए। एचकेआरएन की बजाए जेबीटी अध्यापकों की नियमित भर्ती की जाए। प्राथमिक स्कूलों में सफाई कर्मचारी व चौकीदारों की नियुक्ति की जाए।
प्रमोद कुमार, शिक्षक।
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राजकीय स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं तो काफी बढ़ गई हैं, लेकिन अध्यापक विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा, क्योंकि अध्यापक गैर शैक्षणिक कार्यों में ही उलझकर रह गया है। राजकीय स्कूलों में स्टाफ को पूरा किया जाए। स्टाफ की कमी से कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूलों में गैर शैक्षणिक कार्य बड़ी समस्या है। इस वजह से शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाई भी नहीं करवा पा रहे। कई स्कूलों में 70 विद्यार्थियों पर एक ही शिक्षक है। उन शिक्षक के जिम्मे मिड डे मील व स्कूल से संबंधित अन्य सभी कार्य भी है।
प्रकाश चंद्र, जिला महासचिव, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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पुरानी पेंशन लागू की जाए। राजकीय स्कूलों में शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाए जाएं। विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग एप चलाई जा रही है। इस वजह से शिक्षकों का पाठ्यक्रम पढ़ाई पर फोकस कम हो रहा है। राजकीय स्कूलों को लगातार मर्ज किया जा रहा है और जहां आबादी बढ़ गई है, वहां स्कूल नहीं खोले जा रहे। दुर्गानगर क्षेत्र में प्राथमिक स्कूल की कमी है। इस क्षेत्र में विद्यार्थी ज्यादा हैं।
अमित छाबड़ा, प्रदेश प्रवक्ता, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी शिक्षा ही होती है। इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कॉलेजों में शिक्षकों की स्थाई भर्ती की जाए। यह भर्ती एक बार न होकर निरंतर होनी चाहिए ताकि कॉलेजों में रिक्त पदों को भरा जा सके। शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण भी देना चाहिए, इससे वह समय के साथ अपग्रेड हो सकेंगे।
डॉ. चांद सिंह, डीएवी कॉलेज प्रोफेसर।