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Ambala News: कमरे में कैद सिसकियां और दरवाजे पर पहरा देता अंधविश्वास, प्रिंस हार गया जिंदगी की जंग

Sat, 27 Dec 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला। मृतक युवक प्रिंस की मौत से पहले घर में लेटे के दौरान की फोटो। दल
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अंबाला सिटी। नदी मोहल्ला में एक बंद कमरे के भीतर तीन साल तक मौत और जिंदगी के बीच जद्दोजहद चलती रही लेकिन बाहर पहरा दे रहे अंधविश्वास ने जिंदगी का रास्ता रोक दिया। कपड़ा मार्केट में काम करने वाले प्रिंस (24) की बीमारी को जब परिजनों ने ऊपरी साया मान लिया, तो वहीं से उसकी मौत का काउंटडाउन शुरू हो गया। पड़ोसियों की मदद को ठुकराने वाले और डॉक्टर से दूरी बनाने वाले परिजनों की जिद ने आखिर प्रिंस को मौत की आगोश में सुला दिया। जब शरीर सूखकर कांटा हो गया और हड्डियां जवाब दे गईं, तब जाकर यह खौफनाक दास्तां दुनिया के सामने आई।
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तीन साल पहले अचानक से प्रिंस की तबीयत खराब रहने लगी। परिजनों ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया। जब हाथ पैर चलना बंद हो गए तो उसे झाड़ फूंक के माध्यम से ही सही कराने में जुटे रहे। तब तक प्रिंस के शरीर की हालत और खराब हो गई और वह बेड पर ही आ गया। करीब दो वर्ष पहले परिजनों ने डॉक्टर को दिखाया पर कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद से बेटे प्रिंस को उन्होंने अलग-थलग कमरे में ही छोड़ दिया। स्थानीय लोग बताते हैं कि अगर कोई मदद करने भी जाता तो प्रिंस के परिजन घर में घुसने नहीं देते थे। कोई इलाज के लिए कहता तो कहते थे कि झाड़ फूंक से ही सही हो जाएगा। मगर दिन-प्रतिदिन हालात बिगड़ते गए और वीरवार को प्रिंस ने आखिरकार दम तोड़ दिया।

लोगों ने सूचना दी पहुंचा वंदे मातरम दल
वंदे मातरम दल के संस्थापक सदस्य भरत ने बताया कि बुधवार को एक स्थानीय व्यक्ति ने उनके द्वारा किए गए रेस्क्यू का वीडियो देख उनसे संपर्क किया और प्रिंस के बारे में बताया। इसके बाद वह जब प्रिंस के घर गए तो परिजनों ने बात करने से ही मना कर दिया। इसके बाद जैसे-तैसे वह घर में दाखिल हुए तो हालात देखकर दंग रह गए। कमरे में प्रिंस काफी कमजोर हालत में पड़ा था और आसपास दो ट्राली भरकर कपड़े पड़े थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रिंस के पिता कपड़ा मार्केट में एक दुकान में काम करते हैं और माता घरों में कपड़े साफ करती हैं। दोनों मिलकर 40 से 45 हजार रुपये कमाते हैं। तीन साल पहले बेटे को कोई सीजनली बीमारी हुई फायदा नहीं हुआ तो किसी झाड़फूंक वाले को दिखाया। ऐसे में इसके बाद उन्होंने समझ लिया कि प्रिंस पर ऊपरी चक्कर है और उसे घर में कैद रखना शुरू कर दिया। भरत ने बताया कि प्रिंस की हालत देखकर लगता था कि उसे खाने को भी नहीं मिलता था। वह आठवीं के बाद ही काम पर जाने लगा था।
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शरीर पर रेंग रहे थे कीड़े
दल सदस्यों ने बताया कि युवक के नाखून बड़े हो चुके थे और बालों में कीड़े व जूं रेंग रहीं थी। शुक्रवार सुबह टीम ने युवक का रेस्क्यू करना था, मगर वीरवार रात्रि में युवक की मौत हो गई। परिवार के सदस्य घर में खाना भी कम ही बनाते थे। वह ज्यादातर बाहर ही खाना खाते थे, हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। युवक के शव का शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाया गया।

घर में फैली थी गंदगी, नहीं थी सफाई
दल संस्थापक भरत सिंह ने बताया कि जिस बेड पर युवक लेटा हुआ था। उस बेड पर काफी गंदगी थी। लोगों को भी बाहर बदबू आती थी। छत पर भी गंदे कपड़ों का ढेर लगा था। युवक का रेस्क्यू करने के लिए परिवार से उन्होंने बातचीत की थी, लेकिन परिवार ने झाड़-फूंक से ही बेटे का इलाज करवाने की बात कही। इस युवक को करीब दो वर्ष पहले ही डाॅक्टर को चेक करवाया था। उसके बाद से ही युवक बेड पर था। बेड पर युवक की ऐसी हालत हो गई थी कि उसकी हड्डी ही दिख रही थी और लंबे समय से वह सही तरीके से खाना नहीं खा पाया।

जिला नागरिक अस्पताल में करवाया गया पोस्टमार्टम
करीब तीन वर्षों से बीमार पड़े प्रिंस की वीरवार की रात को मौत हुई थी। पुलिस चौकी नंबर दो ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। शुक्रवार को प्रिंस का संस्कार कर दिया गया। चौकी प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि परिवार की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही माैत के कारणों का पता चल पाएगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई करवाई जाएगी। युवक का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया। वहीं, जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टर पीयूष ने बताया कि युवक प्रिंस का पोस्टमार्टम किया गया। युवक के फेफडों में दिक्कत थी।
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