एक अप्रैल से कसा जाएगा शिकंजा, जारी होगा लाइसेंस
अक्सर देखा जाता है कि हर कोई पुरानी गाड़ी व खरीदने का शुरू कर देता है काम
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। शोरूम डीलरों की तर्ज पर पुरानी कार, बाइक, एक्टिवा आदि वाहनों की खरीद-फरोख्त करने वाले कारोबारियों को परिवहन विभाग में अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा। प्राधिकार प्रमाण-पत्र हासिल किए बिना एक अप्रैल 2023 से वह पुराने वाहनों का व्यापार नहीं कर सकेंगे।
सरकार ने परिवहन विभाग को इस संबंध में सख्त कदम उठाने को कहा है। हालांकि इस संबंध में अभी संबंधित सिस्टम में उतरने में समय लगेगा लेकिन इसे जल्द ही अंबाला में भी लागू कर दिया जाएगा। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ओर से परिवहन विभाग को गाइड लाइन भेजी गई है। यह निर्णय कार बाजार से अनधिकृत रूप से हो रही वाहनों की खरीद फरोख्त की शिकायतों के चलते लिया गया है।
22 दिसंबर को अधिसूचना जारी की गई
केंद्र सरकार की ओर से 22 दिसंबर को इसकी अधिसूचना जारी की गई थी। राज्य इसे अपने स्तर पर लागू करेंगे। बताया जाता है कि इस अधिसूचना में पंजीकृत वाहन स्वामी एवं वाहन डीलर के मध्य वाहन की डिलीवरी की सूचना देने की प्रक्रिया समेत डीलर की जिम्मेदारियों को विस्तृत तौर पर स्पष्ट किया गया है। बता दें कि जिलाभर में पुरानी बाइक-स्कूटी व कार का बाजार पांव जमा चुका है। मुख्य सड़क से लेकर गलियों तक कार बाजार सज रहे। पुराने वाहनों की खरीद व बिक्री करने वाले ऑनलाइन बाजार भी मौजूद हैं। इस संबध में आरटीओ सुशील कुमार का कहना है कि यह सभी पर लागू होगा लेकिन अभी इसमें समय लगेगा।
यह होगी प्रक्रिया
अधिसूचना के मुताबिक, अब वाहन डीलरों को अपने कब्जे वाले वाहनों के पंजीयन प्रमाण-पत्र का नवीकरण कराने, फिटनेस प्रमाण-पत्र के नवीकरण, डुप्लीकेट पंजीयन प्रमाण-पत्र बनाने, एनओसी व स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए आवेदन के अधिकार दिए गए हैं। वाहन स्वामी को संबंधित डीलर को वाहन देने के बाद फार्म-29 (ग) जिसमें वाहन स्वामी व डीलर के हस्ताक्षर होंगे, को यह फार्म पोर्टल के माध्यम से वाहन पंजीयन अधिकारी को भेजना होगा। वाहन लेने व बेचने के बाद डीलर को इसकी जानकारी परिवहन विभाग को देनी होगी।
कैसे मिलेगा प्राधिकार प्रमाण-पत्र
आरटीओ ने बताया कि वाहन डीलर को प्राधिकार प्रमाण-पत्र लेने के लिए परिवहन विभाग से जुड़े वाहन पोर्टल पर प्रारूप-29 (क) में आवेदन करना होगा। इसमें डीलर को अपना नाम, पता, कारोबार का स्थान, मोबाइल नंबर, पैन नंबर, जीएसटी नंबर व ईमेल-आइडी उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए शुल्क आनलाइन जमा होगा। ऐसे में प्राधिकार प्रमाण-पत्र से पंजीकृत वाहनों के डीलरों एवं मध्यस्थों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ऐसे वाहनों की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी की आशंका भी कम होगी।