अंबाला। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर कलानौर से शंभू तक तीसरा ट्रायल रविवार को किया गया जो सफल रहा। इसमें डीजल इंजन की मदद से मालगाड़ी को दौड़ाया गया। कलानौर से शंभू तक विद्युतीकरण और सिग्नल का कार्य चल रहा है। यह अद्भुत नजारा रविवार शाम को अंबाला-दिल्ली नेशनल हाइवे पर देखने को मिला। जहां नीचे सड़क पर वाहनों का आवागमन हो रहा था और ऊपर रेलवे पुल से मालगाड़ी गुजर रही थी।
पहले चरण का ट्रायल 13 जून को पंजाब के शंभू रेलवे स्टेशन से साहनेवाल के बीच किया गया था। दूसरे चरण का ट्रायल 11 जुलाई को हुआ। यह ट्रायल सहारनपुर के पास पिलखनी और कलानौर के बीच किया गया। इसके बाद कलानौर से अंबाला के बीच तीसरा ट्रायल रविवार को किया गया जो सफल रहा।
जुलाई 2016 में शुरू हुआ था कार्य
पंजाब के साहनेवाल से सहारनपुर के पिलखनी तक लगभग तीन हजार करोड़ की लागत से 175 किमी. लंबा अलग रेलवे ट्रैक बिछाने का कार्य जुलाई 2016 में शुरू किया गया था। यह परियोजना 2005 में बनी थी और 2006 में इसे मंजूरी मिली थी। इस ट्रैक पर 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से मालगाड़ियां दौड़ेंगी। ट्रैक का कार्य तीन चरणों में शुरू किया गया। पहले चरण में शंभू से साहनेवाल, दूसरे चरण में पिलखनी से कलानौर और तीसरे चरण में कलानौर से शंभू तक ट्रैक बिछाया गया।
पिलखनी से पंजाब के साहनेवाल तक रेलवे ट्रैक बिछा दिया गया है। तीसरे चरण में कलानौर से शंभू तक मालगाड़ी का ट्रायल किया गया। अभी विद्युतीकरण और सिग्नल का कुछ कार्य लंबित है। यह कार्य पूरा होते ही पूरे सेक्शन पर मालगाड़ियां चलने लगेंगी।
-पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल, अंबाला।