माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार राधा अष्टमी रविवार को मनाई जाएगी। इसको लेकर एक दिन पहले से ही महिलाओं ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी। महिलाएं मंदिरों में शाम के समय कीर्तन करती दिखाई दीं।
सनातन धर्म मंदिर में भी महिलाएं कीर्तन और आरती में शामिल हुईं। इसके साथ ही शृंगार की दुकानों से श्री कृष्ण और राधा के लिए सामान भी खरीदा। वहीं महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए भी राधा अष्टमी पर व्रत रखती हैं। ऐसे में महिलाओं ने व्रत का सामान की भी खरीददारी की गई। इस पर्व को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन राधा जी की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम की वृद्धि होती है।
राधा अष्टमी पर यह है पूजा का मुहूर्त : इस बार राधा अष्टमी की तिथि शनिवार रात्रि 10:46 बजे से आरंभ हो गई। जो 1 सितंबर की सुबह 12:57 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए 31 अगस्त को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक का समय अत्यंत शुभ और फलदायी रहेगा। इस दौरान मंदिरों में जाकर राधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए या घर पर विधि पूर्वक पूजन करने पर भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यह सामान खरीद सकते हैं : पंडित प्रवेश उनियाल ने बताया कि लोग घर पर बांसुरी ला सकते हैं क्योंकि राधा जी को भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी की धुन बहुत पसंद थी। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सामंजस्य का वातावरण बना रहता है।
बांसुरी को घर में किसी पवित्र स्थान पर रखें। कदम वृक्ष की डालियों पर बैठकर श्रीकृष्ण मधुर बांसुरी बजाया करते थे। इसलिए राधा अष्टमी के दिन कदम का पौधा लाना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे आंगन, बालकनी या घर के किसी खुले स्थान पर लगाएं।