अंबाला। खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल विभाग एक तरफ खूब प्रचार पसार कर रहा है। खिलाड़ियों की प्रतिभागिता बढ़ाने के लिए समय-समय पर जिला व राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता करवाई जा रही है। वहीं अभी तक जिले में चल रही कोचों की कमी को ही पूरा नहीं कर सका। अंबाला में खेल विभाग के छह खेलों के कोच नहीं हैं।
खेल महाकुंभ के लिए विभाग ने 26 में से 24 खेलों के लिए चुनौती तो पेश कर दी है। इनमें से भी साइकिलिंग, क्रिकेट, नेट बॉल, कुश्ती आदि के सरकारी कोच ही नहीं है। निजी सेंटरों के सहारे ही विभाग अपनी लाज बचाने की तैयारी में जुट गया है। साइकिलिंग, नेटबॉल व क्रिकेट के खिलाड़ियों की टीम निजी सेंटरों के सहारे हो रही है। यहीं कारण है कि इनमें से अधिकतर खेलों में अभी तक विभाग को कोई नेशनल पदक तक नहीं हासिल हो पाया है।
सात साल से महज कागजों में ही सिमट कर रह गई मांग
जिले में साइकिलिंग, क्रिकेट, टेबल टेनिस व नेट बॉल के कोचों की मांग कोई पुरानी नहीं है। पिछले सात साल से इसके लिए विभाग की तरफ से मांग उठाई जा रही है। जो भी जिला खेल अधिकारी आता है तो वो निजी सेंटरों पर बढ़ते खिलाड़ियों को देखते हुए कोच की मांग को पत्र के जरिये मुख्यालय तक पहुंचाता है लेकिन वह कागजों में ही दम तोड़ देती है।
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ग्राउंड मैन के सहारे कुश्ती
अंबाला कैंट के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम के होस्टल परिसर में कुश्ती का भी इन दिनों कोई कोच नहीं है। ऐसे में स्टेडियम का ग्राउंड मैन ही अपने पहलवानी के जोश को युवाओं में भर रहा है। सुबह व शाम के समय वहीं सेंटर पर खिलाड़ियों को वेकल्पिक व्यवस्था के लिए तैयार कर रहा है। हालांकि कुश्ती का पहले कोच थे। लेकिन बदली होने के कारण दोबारा से सेंटर खाली पड़ गया था। फिर ग्राउंड मैन ने जिम्मा संभालते हुए खिलाड़ियों की फौज को खड़ा किया था।
क्रिकेट, टेबल टेनिस, नेट बॉल, साइकिलिंग, कुश्ती आदि खेलों के लिए सरकारी कोचों के लिए समय-समय पर पत्राचार किया जा रहा है। कुछ समय पहले शहजादपुर के बड़ागढ़ खेल स्टेडियम के लिए हॉकी, कबड्डी आदि के नए कोच मिले हैं। जल्द ही अन्य खेलों के नए कोच आने की उम्मीद है।
राजबीर रंगा, जिला खेल अधिकारी अंबाला