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Ambala News: ई-श्रम पोर्टल पर 2.31 लाख श्रमिक, कोई मरा न घायल हुआ

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वैभव शर्मा
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अंबाला। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के ई-श्रम पोर्टल से जुड़ा नया मामला सामने आया है। अंबाला में 2.31 लाख से अधिक श्रमिकों के ई-श्रम कार्ड बन चुके हैं। अंबाला में एक भी श्रमिक की न तो मृत्यु हुई और न ही चोटिल हुआ। इसका खुलासा ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से हुआ है। केंद्रीय मंत्रालय ने श्रमिकों को ई-श्रम कार्ड बनवाने पर बीमा की सुविधा का लाभ दिया गया था। हैरानी की बात है कि सात महीने तक किसी भी श्रमिक ने इस योजना में बीमा क्लेम ही नहीं लिया। इसके बाद तीन साल तक श्रम विभाग क्लेम के लिए लोगों को खोजता रहा मगर किसी कभी मृत्यु नहीं हुई और न ही कोई चोटिल हुआ।

ई-श्रम कार्ड बनवाने पर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ दिया गया था। यह कार्ड को किसी भी श्रेणी का श्रमिक, कामगार, ईएसआई कार्डधारक आदि बनवा सकता है। उस समय कार्ड बनवाने पर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में कार्ड धारक की काम के दौरान मृत्यु होने पर दो लाख रुपये और दुर्घटना में दिव्यांग होने पर एक लाख रुपये दिए जाने थे। बीमा का यह लाभ 26 अगस्त 2021 को लागू किया गया था जोकि मार्च 2022 तक लागू रहा। सभी श्रम विभाग के स्थानीय कार्यालयों को निर्देश दिए गए थे कि इन सात महीनों के दौरान जिन लोगों की कार्य करते समय मृत्यु हुई है या चोटिल हुए हैं तो उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। योजना की जानकारी नहीं थी या विभाग नहीं पहुंचा ऐसे में यह लाभ अंबाला में किसी को मिल ही नहीं सका। योजना भले ही 2022 में बंद कर दी गई मगर 30 जून 2025 तक श्रम विभाग पोर्टल पर ऐसे श्रमिकों को क्लेम देने के लिए राह ताकता रहा।
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पंचकूला में सिर्फ दो क्लेम आए

दिशा कमेटी की बैठक में केंद्र की ई-श्रम पोर्टल योजना पर समीक्षा की गई तो सांसद वरुण मुलाना और राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा भी कोई क्लेम न होने की जानकारी से हैरान रह गए थे। इसे बाद पंचकूला में दिशा की बैठक हुई तो वहां सामने आया कि सिर्फ दो ही लोगों ने क्लेम के लिए आवेदन किया था। ऐसे में सांसद ने सवाल उठाया कि श्रमिक को जानकारी ही नहीं होगी तो वह योजना का लाभ ही कैसे उठाएगा। यह योजना भले ही केंद्र की है मगर इसमें क्लेम के लिए श्रमिक को स्थानीय श्रम विभाग में आवेदन करना था। इसके बाद श्रम विभाग उन दस्तावेजों को देखकर आगे सिटी मजिस्ट्रेट के पास भेज देता। सिटी मजिस्ट्रेट को इस क्लेम को सेटल करने की शक्तियां दी गई थीं। अगर इस मामले की पड़ताल की जाए तो प्रदेश में कई जिले निकलेंगे जहां श्रमिकों ने क्लेम ही नहीं लिया।



वर्जन

योजना में किसी ने क्लेम ही नहीं लिया। हमने शिविरों में लोगों को जागरूक भी किया था। लोग जब तक क्लेम लेने नहीं आए। -परदिप कुमार, सहायक श्रम आयुक्त, अंबाला
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संगठित क्षेत्र के मजदूरों में जागरुकता की कमी है। इसलिए वह क्लेम नहीं कर पाए होंगे। श्रम विभाग के लिए भी यह समस्या है कि वह किसी के मरने या दिव्यांग होने पर कैसे पहुंचे। उद्योगपति और सामाजिक संगठनों को मिलकर श्रमिकों को जागरुक करना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगार इन स्कीमों की जानकारी देनी चाहिए।-पवन कुमार, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, भारतीय मजदूर संघ
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