अंबाला। छावनी के कलरहेड़ी के जगविंदर की पोस्टिंग बॉर्डर पर है। वह चार मई को एक महीने के अवकाश पर गांव आए थे। मगर एक सप्ताह ही बीता कि सेना ने वापस बुला लिया। शनिवार को वह अपनी तैनाती के स्थान पर रवाना हो रहे थे।
इसी दौरान माता जसपाल कौर और पिता जगतार सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। विदा करते मां बोलीं कि बेटा देश सेवा पहले है, अच्छे से अपनी जिम्मेदारी निभाना। घर की चिंता न करना। इसी दौरान पास में खड़े दादा जसवंत सिंह और दादी सुरजीत कौर ने भी पोते को आशीर्वाद दिया।
दादा जसवंत ने बताया कि उनकी भर्ती 1965 में एडी 25 में हुई थी। 1971 के युद्ध में उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान में बंग्लादेश में घुसकर मोर्चा संभाला था। उस समय डमडम हवाई अड्डे पर भी कुछ समय तैनात रहे थे। इसके बाद पठानकोर्ट में तैनाती कर दी गई। यहां से जब भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया तो वह तीन महीने तक पाकिस्तान के सियालकोट की तहसील शक्करगढ़ में तैनात रहे थे। वह बताते हैं कि वह लड़ाकू जहाज गिराने वाली एल-70 बंदूर चलाते थे। उन्होंने भी पोते को हर मोर्चे पर अडिग रहने की सलाह दी। इस दौरान उनके परिवार टीवी पर हालातों का जाएजा लेता दिखा।
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पत्नी बोली- आप बॉर्डर संभालें, घर की चिंता मुझ पर छोड़ें
अंबाला। अंबाला के कलरहेड़ी की निवासी मनप्रीत की शादी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व पंजाब में हुई है। उनके पति विक्रमजीत सिंह भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं। बॉर्डर पर हालात बिगड़े तो वह भी अपनी तैनाती के स्थान पर पहुंच गए।
उनकी पत्नी अब अपने मायके आ गई हैं। गांव पहुंचने पर उन्होंने बताया कि पति से रोजाना फोन पर बात होती है। यह बॉर्डर के हालातों पर अधिक बात नहीं करते, बस चिंता न करने की बात कहते हैं। मेरी हाल ही में बात हुई तो मैंने कह दिया कि आप बॉर्डर पर हालातों को देखें, घर को मुझ पर छोड़ दें।
जगविंदर का परिवार टीवी पर हालातों को देखता हुआ। संवाद- फोटो : पार्टी
जगविंदर का परिवार टीवी पर हालातों को देखता हुआ। संवाद- फोटो : पार्टी