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Ambala News: बारिश से भूसे के दाम में उछाल, 800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा

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घास मंडी में वरसीम की ट्रॉली बोली के लिए खड़ी हुई। संवाद
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- गेहूं की फसल में नमी बढ़ने के कारण न तो खरीद हो पा न लिफ्टिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी,

अंबाला सिटी, जलबेड़ा। बारिश का असर अनाज मंडी तक सीमित नहीं है बल्कि चारा मंडी में काम प्रभावित हो गया है। गीली मिट्टी के कारण तूड़ी और हरे चारे की आवक ठप हो गई है। पहले जहां रोजाना 30-35 टेंपो तूड़ी आती थी, अब केवल 3-4 ही पहुंच रहे हैं। नई तूड़ी न आने से पुरानी तूड़ी के दाम 800 रुपये प्रति क्विंटल के पार निकल गए हैं। जबकि अभी तक 700 रुपये से लेकर 750 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिल रहे थे। इसका असर यह है कि पशुओं को पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं मिलेगा।
गेहूं की खरीद और लिफ्टिंग प्रभावित

बेमौसम बारिश और खराब मौसम ने अंबाला शहर की अनाज मंडी में व्यवस्थाओं को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गेहूं की फसल में नमी बढ़ने के कारण न तो सरकारी खरीद सुचारू रूप से हो पा रही है और न ही खरीदे गए माल की लिफ्टिंग हो रही है। मंडी में खुले में पड़ा गेहूं अब किसानों के लिए गले की फांस बन गया है। मंडियों में बारिश के पानी की ठीक से निकासी न होने के कारण किसान मच्छरों से परेशान हैं। नालियों में मच्छर पनप रहे हैं। वहां रात गुजार रहे किसानों और मजदूरों का जीना मुहाल हो गया है।
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कटाई प्रभावित

मार्केट कमेटी द्वारा मंडी में बनाए गए तीन शेड नाकाफी साबित हो रहे हैं। अधिकांश फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है, जो बारिश में भीगने के कारण अत्यधिक नमी का शिकार हो गई है। किसानों का कहना है कि प्रति एकड़ 20,000 से 25,000 की लागत लगाने के बाद भी उन्हें फसल बेचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। धूप न निकलने के कारण गेहूं सूख नहीं पा रहा, जिससे खरीद एजेंसियां हाथ पीछे खींच रही हैं। किसान सूरजभान, सुखबीर सिंह, अमरीक सिंह और जसवीर सिंह ने बताया कि खेतों में पानी भरने से फसल बिछ गई है। अगर आज मौसम साफ भी हो जाए, तो कटाई शुरू करने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा।

19802 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा

बुधवार शाम 6 बजे तक जिले की विभिन्न मंडियों से कुल 19,802.7 मीट्रिक टन गेहूं खरीद किया जा चुका है। हालांकि, उठान की धीमी गति अभी भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कुल खरीद का मात्र 3.3 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक गोदामों तक पहुंच पाया है। खरीद के मामले में मुलाना मंडी सबसे आगे चल रही है, जहां अब तक 4,901 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जिले के कुल 3,449 किसानों ने अब तक अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर बेची है। सबसे बड़ी खरीददार बनकर उभरी है, जिसने 12,912 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। खाद्य विभाग ने 2,465 मीट्रिक टन की खरीद की है, जिसमें से 5.4 प्रतिशत अनाज का उठान सुनिश्चित किया गया है। हरियाणा वेयरहाउस कॉर्पोरेशन ने 4,425.7 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है, लेकिन उठान की रफ्तार यहां भी 2.6 प्रतिशत पर सिमटी हुई है।
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पिछले साल के मुकाबले जल्दी मंडियों में पहुंचे किसान

पिछले साल के मुकाबले इस बार किसान जल्दी मंडियों में पहुंच रहे हैं। पिछले वर्ष आज ही के दिन तक केवल 3,306.4 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। इस लिहाज से इस बार आवक और खरीद में भारी उछाल देखा जा रहा है। पिछले पूरे वर्ष के दौरान कुल खरीद 2,44,150 मीट्रिक टन रही थी। नारायणगढ़ मंडी में उठान की स्थिति अन्य मंडियों से बेहतर है, जहां 22.8 प्रतिशत गेहूं का उठान किया जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में ट्रकों की संख्या बढ़ाकर उठान कार्य में तेजी लाई जाएगी ताकि किसानों को मंडी में जगह की कमी का सामना न करना पड़े। । प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में ट्रकों की संख्या बढ़ाकर उठान कार्य में तेजी लाई जाएगी ताकि किसानों को मंडी में जगह की कमी का सामना न करना पड़े।

घास मंडी में वरसीम की ट्रॉली बोली के लिए खड़ी हुई। संवाद

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