अंबाला। अवैध अतिक्रमण पर कैंटोनमेंट बोर्ड जल्द ही शिकंजा कसेगा। रक्षा संपदा विभाग के साथ प्राथमिक चरण में बोर्ड ने 50 के करीब संपत्तियों का खाका तैयार किया है।
जिन पर दुकानों व अन्य प्रतिष्ठान आदि बनाए गए हैं। ऐसे में पुलिस के साथ मिलकर एक बढ़ा अभियान चलाया जाएगा। हालांकि अभी इस संबंध में बोर्ड अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जबकि दूसरे चरण में सेन्य क्षेत्र के अधीन उन संपत्तियों का आंकलन किया जा रहा है, जहां अनिधकृत तरीके से निर्माण हो चुका है।
संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सजग हुए दोनों विभाग :कैंटोनमेंट बोर्ड व सेना के अधीन संपत्तियों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट के हिसाब से दोनों विभागों की संयुक्त टीमें धरातल पर उतरकर कार्य कर रही हैं। नक्शे सहित अन्य दस्तावेजों के आधार पर विभागों से संबंधित संपत्तियों को चिह्नित किया जा रहा है ताकि कार्यवाही करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो और निष्पक्ष रूप से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आरंभ की जा सके।
पहले दिया जाएगा नोटिस: अतिक्रमण पर पीला पंजा चलाने से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जाएगा। नोटिस में जमीन व दुकान आदि से संबंधित दस्तावेज मांगे जाएंगे। इसके लिए लगभग 10 से 15 दिन का समय दिया जाएगा। अगर संबंधित व्यक्ति दस्तावेज जमा नहीं करवाता या फिर खुद ही अतिक्रमण नहीं हटाता तो बोर्ड व रक्षा संपदा विभाग संयुक्त तौर पर कार्यवाही करेगा और तोड़-फोड़ के अलावा संपत्ति को सील भी करेगा।
50 साल पुराना विवाद: तोपखाना परेड सहित रक्षा संपदा विभाग की जमीन को खेती बाड़ी के लिए दिया गया था। इसकी लीज वर्ष 1975 में खत्म हो गई। इसके बाद लीज बढ़ाने को लेकर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई और इसी उधेड़-बुन में लगभग 50 वर्ष बीत गए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भूमि पर मकान व दुकान आदि का निर्माण शुरु कर दिया। कुछ लोगों ने विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना ही जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। जब इसका खुलासा हुआ तो बोर्ड सहित रक्षा संपदा विभाग ने सीलिंग की प्रक्रिया आरंभ कर दी। संवाद हो चुके प्रदर्शन : मालिकाना हक को लेकर स्थानीय निवासी लगातार रोष प्रदर्शन करते आ रहे हैं। पूर्व में भी स्थानीय लोगों ने लगातार कई महीनों तक भूख-हड़ताल की थी। लेकिन आश्वासन मिलने के बाद भी कोई उचित कार्यवाही नहीं हुई। जबकि दो माह पहले स्थानीय लोगों ने चंडीगढ़ तक डांडी मार्च निकाला था।