शिक्षिका और डीपीई मलकीत सिंह के साथ नेशनल खिलाड़ी रितिका।
अंबाला। मजदूर पिता के घर जन्मे तीन बच्चों ने कभी सपने में नहीं सोचा था कि वे खेल की दुनिया में पहचान बनाएंगे। वे एथलेटिक में भाग लेंगे और अपना और अपने पिता का नाम रोशन करेंगे।
हम बात कर रहे हैं रितिका और उसके दो भाइयों की। इनके पिता विनोद मजदूरी से घर का खर्च चलाते हैं। इसके बावजूद रितिका ने मेहनत की और दौड़ में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बहन को देखकर बड़ा भाई और छोटा भाई भी एथलेटिक्स की तैयारी करने लगा। ये दोनों भी राष्ट्रीय और स्टेट स्तर पर पहचान बना चुके हैं। खिलाड़ी बताते हैं कि पिता खेल के लिए खुराक नहीं दिला पा रहे थे तो डीपीआई कोच मलकीत सिंह ने रितिका के लिए खुराक का इंतजाम किया। इसके बाद रितिका नहीं रुकी।
ऐसे हुई रितिका के खेल की शुरुआत
रितिका गांव के ही राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है। जब वह आठवीं कक्षा में थी। तब गांव के बच्चे स्कूल के मैदान में खेलने जाते थे। यह देख रितिका के मन में खेलने की उमंग जागी और रितिका ने दौड़ना शुरू किया। रितिका ऐसी दौड़ी कि राज्य स्तर पर प्रथम आई। तीन बार नेशनल खेल एक स्वर्ण लिया और दो बार भागीदारी रही।
ये है रितिका की उपलब्धियां
जिला स्तर 12 स्वर्ण, पांच साल तक स्टेट खेली, जिसमें एक स्वर्ण और दो रजत, भोपाल और महाराष्ट्र में दो बार नेशनल चैंपियनशिप में भागीदारी की। इसके अलावा गुरुग्राम में आयोजित तीसरे नेशनल में स्वर्ण पदक जीता। गीता जयंती पर पांच किलोमीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।