अंबाला सिटी। खेती-किसानी के लिए बिजली को बुनियादी जरूरत मानते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की अदालत ने एक किसान के हक में फैसला सुनाया है। अदालत ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम को आदेश दिया है कि बकाया राशि जमा होते ही किसान का ट्यूबवेल कनेक्शन तुरंत बहाल किया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय की है, जिसमें बिजली निगम को लिमिटेशन एक्ट के तहत दायर आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला मोहम्मद बनाम यूएचबीवीएन से जुड़ा है। दरअसल, बिजली निगम ने किसान पर 60,000 रुपये का जुर्माना और बकाया निकाला था, जिसे लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। इससे पहले सिविल कोर्ट और प्रथम अपील अदालत ने निगम के मेमो को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के तकनीकी कारणों से उन फैसलों को पलट दिया था, इसके बाद किसान ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 154 के तहत दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया। किसान के वकील ने दलील दी कि सिंचाई के अभाव में फसलें बर्बाद हो रही हैं, इसलिए बिजली का कनेक्शन बहाल करना बेहद जरूरी है।