अंबाला। अंबाला में बनने वाला उत्तर भारत का पहला राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) का निर्माण विभागीय हीलाहवाली के चलते पिछड़ता जा रहा है। अब हालत यह है कि केंद्र के निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से 14 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की गई थी। मगर समय से काम नहीं हो सका तो अब वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर इस राशि को सरेंडर किया जा रहा है। परियोजना में देरी होने से कुल 42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र का अब आगामी वित्तीय वर्ष में बजट भी बढ़ सकता है। क्योंकि डेढ़ साल से अधिक से यह परियोजना अटकी हुई है। ऐसे में अब नए वित्तीय वर्ष में दोबारा से बजट की मांग की जाएगी जबकि वर्तमान स्थिति तक इस केंद्र में कार्य को शुरू कर देना चाहिए था।
केंद्र के स्थान पर नहीं डाल सके मिट्टी
अंबाला में एनसीडीसी खोलने को लेकर घोषणा तो पहले ही कर दी गई थी। मगर पिछले वर्ष जनवरी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने अंबाला में एनसीडीसी का शिलान्यास किया था। अंबाला में इस सेंटर को लाने के लिए तत्कालीन गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान में ऊर्जा परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने काफी कोशिशें की थीं। जब इसका शिलान्यास हुआ तो नग्गल में जिस स्थान पर यह सेंटर बनाना है वहां पर नगर परिषद को मिट्टी का भराव करना था।
जिससे कि सेंट्रल पीडब्ल्यूडी निर्माण का कार्य कर सके। मगर नगर परिषद की ढीले रवैये से यह कार्य लटका रहा। अभी तक भी यह कार्य पूरी तरह नहीं हो सका है। यही प्रमुख कारण है कि सीपीडब्ल्यूडी अपना काम ही समय से शुरू नहीं कर सकी। ऐसे में परियोजना लटक गई। निर्माण में जितनी देरी हो रही है उतना ही असर परियोजना की लागत पर पड़ रहा है।
चार एकड़ भूमि पर बनना है केंद्र, यह होंगी सुविधाएं
इस केंद्र के लिए स्वास्थ्य विभाग को चार एकड़ जमीन दी जा चुकी है। केंद्र में प्रतिक्षाकक्ष, लॉबी, कांफ्रेंस हॉल, कार्यालय, सुरक्षा कमरा, आईटी वीडियो कमरा, मुख्य अधिकारी का कमरा एवं अन्य प्रशासनिक क्षेत्र होंगे। पहले तल पर सेंपल एकत्रित करण एवं यूटीलिटी, प्रतिक्षालय, जलवायु परिवर्तन, ईओसी, प्रशिक्षण, आईडीएसपी, ईपीडीमिलॉजी की सुविधा होगी तो दूसरे तल पर लैब और अन्य उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
एम्स की तरह मिलेगी जांच सुविधा
इस केंद्र में बीमारियों से संबंधित वह जांचें भी हो सकेंगी जो अन्य किसी अस्पताल या फिर स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं हो पाती हैं। केंद्र के बनने से लोगों को दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही यहां पर अलग- अलग प्रकार के वायरस पर भी शोध किया जाएगा। हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर से आने वाले सैंपल भी यहां पर जांचे जाएंगे।