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Ambala News: आंसू गैस के गोलोंं ने 100 मीटर तक मचाई जलन

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अंशु शर्मा
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अंबाला। दिल्ली पैदल कूच के लिए रविवार को निकाला दूसरे मरजीवड़ा जत्था भी पुलिस के पहले सुरक्षा चक्र को भेद नहीं पाया। बार्डर पर चली तेज हवाएं ही किसानों के लिए परेशानी बनी रही। टकराव के बीच जब-जब आंसू गैस के गोले पुलिस द्वारा छोड़े गए तो किसानों की तरफ गैस ने करीब 100 मीटर की दूरी तक हवा के साथ मार की। आंखों में जलन व बार-बार खांसी से दम घुटता रहा। जो किसान मंच से भी दूर किसान नेताओं द्वारा लगाई गई रस्सी से पीछे खड़े थे वो भी इस धुंए से परेशान हुए।
इस बीच किसानों ने पुलिस की सुरक्षा कवच जाली को भी रस्सी के आगे लगी कुंडी से खिंचने का प्रयास करते हुए क्षतिग्रस्त कर दिया था। यहां तक कंटीली तारों को भी खींच दिया था। दरअसल, विरोध बढ़ने पर पुलिस ने भीड़ पर दो तरह से इस गोलों को इस्तेमाल किया। पहला हथगोले के रूप में और दूसरा टियर स्मोक ग्रेनेड के रूप में। हथगोला को भीड़ के पास में ही होने की स्थिति में हाथ से फेंका तो टियर स्मोक ग्रेनेड की गन से मार की गई।
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दरअसल, आंसू गैस के गोले एक ऐसा बम होता है, जिससे धुआं रिलीज होता है। यह धुआं इसकी रेंज में आने वाले व्यक्ति को परेशान कर देता है।


रिटायर्ड फौजी के साथ-साथ किसान भी जत्थे में शामिल

किसानों नेताओं की तरफ से दूसरे जत्थे की रणनीति में बदलाव दिखा। इस जत्थे में नौजवानों की संख्या में बढ़ी हुई थी। जो उम्रदराज किसानों के संग कंधे से कंधा मिलाकर पुलिस के टकराव में संग दिखे। उधर, इस जत्थे में सामान्य किसानों के साथ-साथ कुछ किसान तो थे लेकिन वह सेना से रिटायर्ड थे। ऐसा ही एक किसान था अमृतसर के लखविंद्र सिंह। उन्होंने बताया कि सेना में नायब थे और 15 साल की नौकरी के बाद आ गए थे। पहले देश की सेवा की और किसानों की लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


ड्रा सिस्टम से ही जत्थों में शामिल किसान, मेडिकल पूरी तरह फिट

दिल्ली कूच के लिए पहले जत्थे में जाने वाले 101 किसानों का चयन ड्रा सिस्टम द्वारा किया गया था। किसान नेताओं का कहना था कि काफी मुश्किल था कि दूसरे किसानों को इसमें शामिल न करना। किसानों की संख्या ज्यादा थी। ऐसे में ड्रा सिस्टम के जरिए किसानों को अलग-अलग जत्थों में बांटा गया था। जबकि इनमें शामिल उम्रदराज किसानों को भी आंदोलनों का काफी अनुभव है। वह हर स्थिति से निपटने को तैयार है। यहां तक कि यह मेडिकल में भी पूरी तरह से फिट है।
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किसान नेताओं ने दिखाई रबड़ की गोलियां

पुलिस के संग रविवार को हुए टकराव के बाद कुछ किसान नेताओं ने रबड़ की गोलियां दिखाते हुए मारने के भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि यह गोलियां बिना मतलब के किसानों पर बरसाई गई। कहा कि आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ रबड़ की गोलियां व पानी की बौछारें भी की। दिल्ली न जाने देने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
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