अंबाला सिटी। टीबी रोगियों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब जांच के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टीके में बदलाव किया है। जहां पहले मोंटेक्स टेस्ट किया जाता था। इसमें मोंटेक्स टीके का इस्तेमाल होता था। अब इस टीके की जगह सीवाई टीके का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मरीज को लगाने के बाद मोंटेक्स की 48 घंटाें में मिलने वाली रिपोर्ट से कम समय लगेगा। इसके साथ ही यह टीका मोंटेक्स से अधिक कारगर है।
इसलिए टीके में करना पड़ा बदलाव ः कई बार देखने में आता है कि जो व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है। उसके परिवार या आसपास के लोगाें को भी बैक्टीरिया से ग्रस्त होने का खतरा रहता है। ऐसे मरीजों को चिन्हित करने के लिए ही विभाग यह टेस्ट करता है। इससे मरीजों का एक्स रे भी करने की जरूरत नहीं पड़ती। टीका लगने के बाद चितके पड़ जाते हैं और उसी चितके से तरल का सैंपल लिया जाता है।
अठारह वर्ष से अधिक आयु वालों को लग सकेगा टीका ः निदेशालय के निर्देशों में सामने आया है कि यह टीका अठारह वर्ष से ऊपर वाले सभी लोगों को लगाया जा सकता है। टीका लगने के बाद अगर इंडयुशन पांच एमएम से अधिक आता है तो उसके संक्रमित मान जाता है। इसके बाद आगे की जांच के लिए अन्य टेस्ट किए जाते हैं। मोंटेक्स टेस्ट में बहुत थोड़ी सी मात्रा में टयुबरकुलीन डाला जाता था। इसके बाद त्वचा पर उभार आने पर अन्य जांच करवानी पड़ती थी लेकिन सीवाई आधुनिक है इससे संक्रमण का पता जल्दी चल जाता है। सीवाई टीबी टेस्ट टीका लगने के बाद त्वचा पर पड़ने वाले उभार की गहराई और आकार से ही संक्रमण का पता चल जाएगा। संवाद
अपनी बारी का इंतजार करते हुए मरीज। संवाद