अंबाला। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के एमएसएमई सप्ताह का शुभारंभ मुख्यातिथि चीफ पोस्ट मास्टर जनरल मी.र. शॅरिंग ने किया। यह कार्यक्रम छावनी माल रोड स्थित खादी और ग्रामोद्योग आयोग के कार्यालय में आयोजित किया गया। शिविर में खादी संस्थाओं प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के लाभार्थियों ने भाग लिया। जनरल मी.र. शॅरिंग ने उद्यमिता और स्वरोजगार द्वारा उपस्थित प्रतिनिधियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए, ताकि राष्ट्र का समुचित विकास हो सके।
आयोग के निदेशक आई जवाहर ने खादी और ग्रामोद्योग द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कपास और रेशम के हाथ से कते धागों से दो या दो से अधिक धागों के मिश्रण से हथकरगा पर भारत में निर्मित वस्त्र खादी कहलाता है। इसकी पहचान के लिए खादी मार्का लागू किया गया। खादी के कपड़ों की डिजाइनिंग के लिए संस्थाओं की विपणन विकास सहायता (एमडीए) ब्याज, सब्सिडी, पात्रता प्रमाणपत्र सहित अन्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्रामोद्योग के तहत क्षेत्र में विभिन्न परंपरागत गतिविधियों के कारीगर, कुम्हार, चमड़े के कारीगर, अगरबत्ती बनाने वाले, दोने और पत्तल बनाने वाले, लकड़ी के उत्पादों के कारीगर, मधु मक्खी पालकों को उन्नत करने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह का गठन कर उन्हें प्रशिक्षण और विभिन्न प्रकार की मशीनों का वितरण कराया गया गया है।
कार्यक्रम में पीएमईजीपी लाभार्थी महिला उद्यमी पूनम गुप्ता और अनिल कुमार ने सफलता की कहानी सुनाई। उन्होंने इस योजना के लाभों से अवगत कराया। कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग के तकनीकी विशेषज्ञ अमित चोपड़ा ने मंच संचालन किया। उन्होंने विभाग की योजनाओं के साथ संयुक्त राष्ट्र के आठवें उद्देश्य के तहत सतत विकास की प्राप्ति के बारे में बताया।