विवादों की भेंट चढ़ी सतलुज यमुना लिंक नहर की वर्तमान स्थिति हरियाणा में भी बेहतर नहीं है। फंड और देखरेख के अभाव के चलते वर्षो से ये नहर जर्जर हालत में है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने की वजह से हरियाणा सरकार ने अपने हिस्से में अभी तक इसके निर्माण की कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। अंबाला, कुरुक्षेत्र व करनाल में इस नहर की लंबाई करीब 92 किलोमीटर है। ये नहर पंजाब के गांव कपूरी से होते हुए नग्गल क्षेत्र से अंबाला में प्रवेश करती है, उसके बाद कुरुक्षेत्र से होती हुई करनाल में पश्चिमी यमुनानहर में मिल जाती है।
अमूमन साल भर सूखी रहती है यह नहर, मानसून सीजन में अत्यधिक जलभराव के कारण इसमें छोड़ा जाता है पानी
अमूमन पूरे साल यह नहर सूखी रहती है मगर मानसून सीजन में अत्यधिक जलभराव के चलते विभिन्न क्षेत्रों का बरसाती पानी इस नहर के जरिए आगे निकाला जाता है। पिछले दिनों आई बाढ़ के चलते इन दिनों भी ये नहर बरसाती पानी से भरी है मगर कई जगह इसके किनारे दरके हुए हैं तो कहीं जलकुंभी खड़ी है। कुरुक्षेत्र में कई बार मारकंडा व दूसरी नहरों का पानी ओवरफ्लो होने पर इसमें छोड़ा जाता है। नहर आज भी कहीं दुरूस्त है तो कहीं बेहद खस्ताहाल में है। प्रशासन घास-फूंस की सफाई तक नहीं करवा पा रहा है।
नहर की मरम्मत के लिए करीब सवा दो करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा
करनाल में एसवाईएल नहर का क्षेत्र बुटेड़ा से लेकर काछआ हेड तक करीब 27 किलोमीटर पड़ता है। इस नहर में सिंचाई विभाग की ओर से पानी का प्रवाह किया जाता है। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राजेश चोपड़ा ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से इस नहर की मरम्मत के लिए करीब सवा दो करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा गया है। जैसे ही विभाग की ओर से स्वीकृति मिलेगी नहर की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। सिंचाई विभाग की पैमाइश के हिसाब से करनाल में इसका क्षेत्र 48 से 75 आरडी बनता है। काफी समय से नहर की मरम्मत न होने से यह जर्जर हो गई है। अगले वर्ष तक नहर की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पंजाब की तरफ से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया
अंबाला में पंजाब से हरियाणा की तरफ आने वाली एसवाईएल में नहर बनने के बाद से आज तक पानी नहीं आया है। पंजाब की तरफ नहर में जलकुंभी उगी है। इसी तरह हरियाणा के क्षेत्र में भी यह नहर बंद है। नहर में पंजाब की तरफ से कभी पानी नहीं छोड़ा गया। सिंचाई विभाग से एक्सईएन एसवाईएल रणबीर त्यागी ने बताया कि एसवाईएल नहर के बनने से लेकर आज तक पंजाब की तरफ से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। बरसाती पानी नहर में भरा रहता है। एसवाईएल नहर को करीब 1985 में बनाया गया था।