केंद्र सरकार की बैंकों को निजीकरण करने की योजना सिरे चढ़े या न चढ़े, लेकिन इसका असर आमजन को भुगतना पड़ा। वीरवार को जिले के 12 राष्ट्रीयकृत बैंकों की 150 शाखाओं का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। इस कारण रोजाना होने वाले दो हजार करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। हालांकि 16 व 17 दिसंबर को होने वाली दो दिवसीय हड़ताल को लेकर बैंक यूनियन की ओर से पहले ही आमजन को जानकारी दे दी गई थी।
बैंकों का निजीकरण करने के लिए केंद्र सरकार मौजूदा शीतकालीन सत्र में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन करने हेतु बिल पेश करने जा रही है। इसके विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर यह हड़ताल की गई। देशभर में इस बिल और निजीकरण का विरोध किया जा रहा है। इसी के तहत छावनी में वीरवार सुबह सभी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने राय मार्केट में बैंक ऑफ इंडिया के सामने धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्य बाजारों में रैली निकालकर रोष जताया।
यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि इस हड़ताल को किसान, मजदूर, बैंक ग्राहकों, रेलवे विभाग के कर्मचारियों और अन्य सरकारी संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के चेयरमैन कामरेड आरके गुलाटी, अखिल भारतीय बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन हरियाणा जिला कमेटी के महासचिव कामरेड जीएस ओबराय ने बताया कि यदि ऐसा हुआ तो देश में बहुत गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी। भारत आर्थिक रूप से पिछड़ जाएगा। हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के सचिव कामरेड पीसी चौहान ने बताया कि अगर सरकार ने बैंकों को निजीकरण करने के अपने फैसले को निरस्त नहीं किया तो देशभर के 10 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।
कामरेड सुशील शर्मा ने कहा कि हड़ताल करना उनकी मजबूरी है। उनका उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है। यदि सरकारी बैंकों का निजीकरण किया गया तो इसके दुष्प्रभाव आम जनता पर भी पड़ेंगे। इस मौके पर बलजीत सिंह, विश्वास कत्याल, अनिल ग्रोवर, अनिल शर्मा, विनोद कश्यप, मनजोत सिंह व अनिल मल्होत्रा व अन्य मौजूद रहे।
बैंकों के निजीकरण से होने वाली हानियां गिनवाईं
यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि इस कारण वित्तीय समावेश के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पाएगी।
सरकारी योजनाओं के बेहतर प्रबंधन में बाधा उत्पन्न होगी।
सूदखोरी और महाजनी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा।
समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग बैंकों से कट जाएगा।
गरीब तबकों को ऋण अत्यंत उच्च दर पर प्राप्त होगा।
सरकारी ऋण पर पनपने वाले मध्यम लघु और कुटीर उद्योग ध्वस्त हो जाएंगे।
असंगठित क्षेत्रों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होगी।
बैंकों में सुरक्षित रोजगार के अवसर समाप्त हो जाएंगे।
देश की आर्थिक संवृद्घि दर प्रभावित होगी।
भारत सरकार की अनेकानेक योजनाएं असफल हो जाएंगी।
बैंक उच्च आय वर्ग विशेष के धन की रखवाली करने वाला बना जाएगा।
देशवासियों का आर्थिक शोषण निजी बैंकों के माध्यम से बढ़ेगा।
बैंक की दो दिवसीय हड़ताल के दौरान अंबाला छावनी स्थित कालीबाड़ी मंदिर के पास पंजाब नेशनल बैंक के ए- फोटो : Ambala