अंबाला। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में रेलवे के विशेष मजिस्ट्रेटों (एसआरएम) की शक्तियों की सीमा तय कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टिकट चेकिंग एक विशेष कार्य है और मजिस्ट्रेट इसमें हस्तक्षेप या इसका नियंत्रण नहीं कर सकते।
न्यायमूर्ति की पीठ ने अंबाला की तत्कालीन वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक प्रवीण गौड़ द्विवेदी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट इस मामले में अपने ही कारण के जज बनने की कोशिश कर रहे थे।
9 साल का संघर्ष और न्याय की जीत : यह मामला साल 2016 का है, जब अंबाला के विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट ने औचक निरीक्षण के लिए रेलवे से अलग से मजिस्ट्रेट स्क्वाड (टिकट चेकिंग स्टाफ) की मांग की थी। रेलवे अधिकारियों ने महाप्रबंधक के वार्षिक निरीक्षण में व्यस्तता और पदों की कमी के कारण स्टाफ देने में असमर्थता जताई थी।
इससे नाराज होकर मजिस्ट्रेट ने इसे न्यायिक कार्य में बाधा मानते हुए महिला अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 186, 187 और 217 के तहत केस दर्ज करा दिया था। वरिष्ठ वाणिज्यिक प्रबंधक पिछले 9 वर्षों से इस कानूनी लड़ाई और मानसिक प्रताड़ना को झेल रही थीं। संवाद